Cough Syrups Death Case: 11 मासूमों की मौत के बाद डॉक्टर गिरफ्तार, कंपनी पर भी गाज

Cough Syrups Death Case

Cough Syrups Death Case

Cough Syrups Death Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीला कफ सिरप लिखने के आरोप में डॉक्टर प्रवीण सोनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार देर रात की गई इस गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने डॉक्टर और श्रीसन कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बताया जा रहा है कि डॉ. सोनी ने बच्चों को बार-बार वही जहरीला सिरप प्रिस्क्राइब किया, जिसकी वजह से 11 मासूमों की जान चली गई। यह शिकायत स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ अंकित की ओर से दर्ज कराई गई थी।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
सरकार की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्चों की मौत लापरवाही के कारण हुई। जिस कफ सिरप का सेवन बच्चों को कराया गया, उसमें 46.2% डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया। यह रसायन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक जहरीला है और मौत का कारण बना। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नागपुर से आई बायोप्सी रिपोर्ट में भी चेतावनी के बावजूद डॉक्टर सिरप लिखते रहे।

छह मौतों के बाद जागा प्रशासन
पहली बार जब छिंदवाड़ा में छह बच्चों की मौत हुई थी तभी प्रशासन हरकत में आया। पांच दिन चली जांच के बाद रिपोर्ट ने स्थिति और गंभीर कर दी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप को इससे पहले राजस्थान और तमिलनाडु में बैन किया जा चुका था।

CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए पूरे प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप पर तत्काल बैन लगा दिया है। उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने और बीमार बच्चों का पूरा इलाज सरकार की ओर से कराने का ऐलान किया। सीएम ने साफ कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

कोल्ड्रिफ सिरप और कंपनी पर कार्रवाई
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोल्ड्रिफ सिरप के सैंपल मिलावटी पाए गए हैं। इसमें पाया गया 48.6% डायएथिलीन ग्लाइकॉल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे में इसकी बिक्री और वितरण को तुरंत रोका गया है। साथ ही श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के अन्य सभी उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाते हुए उनकी जांच करने का निर्देश दिया गया है।

कड़ी निगरानी और छापामारी अभियान
प्रदेशभर में दवा दुकानों पर छापामारी चल रही है और कोल्ड्रिफ सिरप की सभी खेप जब्त की जा रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि यह सिरप कहीं और मिले तो उसे तुरंत फ्रीज कर नमूना परीक्षण के लिए भेजा जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दवाओं की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाए।

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