फर्जी नियुक्ति पत्रों के दम पर 9 लोग कर रहे थे सरकारी नौकरी, कलेक्टर लिए संज्ञान, दिए जांच के आदेश
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में बड़ा भर्ती घोटाला सामने आया है। यहां नौ लोगों ने शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर खुद को तृतीय श्रेणी की सरकारी नौकरी पर नियुक्त करा लिया। ये सभी पिछले करीब 38 महीनों से नियमित कर्मचारी की तरह कार्यरत हैं। मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने इस घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से बने सहायक ग्रेड-3 और डाटा एंट्री ऑपरेटर
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 में इन लोगों ने राजनांदगांव और मोहला के शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से सहायक ग्रेड-3 और डाटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर नियुक्ति पत्र तैयार करवाया। इन जाली नियुक्ति आदेशों पर दो अलग-अलग अपर सचिवों के हस्ताक्षर दिखाए गए। इसके बावजूद विभाग ने दस्तावेजों की वैधता की जांच किए बिना ही इन्हें जॉइनिंग दे दी।
व्यावसायिक परीक्षा मंडल का भी लिया गया झूठा सहारा
इन नियुक्तियों में यह भी दिखाया गया कि चयन व्यापम (CG Vyapam) के माध्यम से वर्ष 2019-20 की परीक्षा से हुआ है, जबकि असल में इन लोगों ने उस प्रक्रिया में भाग ही नहीं लिया था। कोरोना काल के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया गया।
प्रमुख पोर्टल पर खबर आते ही हुई कार्रवाई
जब इस घोटाले की जानकारी प्रमुख डिजिटल मीडिया हरिभूमि डॉट कॉम पर विस्तार से छपी, तो प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) फत्तेराम कोसरिया को मामले की गहराई से जांच करने का निर्देश दिया है।
अवैध नियुक्तियों में आयोग का नाम, पर अधिकार नहीं
नियुक्ति पत्रों में छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के सचिव ओपी मिश्रा और अवर सचिव सरोज उइके के नाम का प्रयोग किया गया है। जबकि शिक्षा आयोग को किसी प्रकार की सरकारी नियुक्ति का अधिकार ही नहीं है। यह अपने आप में एक बड़ा फर्जीवाड़ा है।
अब विभाग कर रहा पल्ला झाड़ने की कोशिश
जिला शिक्षा अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि इन लोगों को पहले राजनांदगांव में पदस्थ किया गया था, और बाद में नए जिले में उनकी पदस्थापना हुई। जबकि जांच में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि नियुक्ति पत्रों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
