Chhattisgarh RTE Admission Crisis: RTE पर बड़ा विवाद, 6 हजार से ज्यादा निजी स्कूलों ने एडमिशन से किया इनकार, गरीब बच्चों की पढ़ाई पर संकट

Chhattisgarh RTE Admission Crisis: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस साल छात्रों को प्रवेश नहीं देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के 6 हजार से ज्यादा निजी स्कूलों में RTE एडमिशन प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।

एसोसिएशन का बड़ा फैसला

प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि सरकार द्वारा RTE के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे निजी स्कूलों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार और शिक्षा विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से मजबूरी में यह निर्णय लिया गया है।

असहयोग आंदोलन का ऐलान

एसोसिएशन ने इसे असहयोग आंदोलन का हिस्सा बताते हुए कहा कि इस वर्ष RTE के तहत चयनित छात्रों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। लॉटरी के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों की एडमिशन प्रक्रिया में भी सहयोग नहीं किया जाएगा।

एसोसिएशन का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही और संवेदनहीन रवैये के कारण यह स्थिति बनी है, जिसका खामियाजा गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को भुगतना पड़ेगा।

क्या है पूरा विवाद?

RTE के तहत छत्तीसगढ़ में वर्ष 2011 से निजी स्कूलों में एडमिशन की व्यवस्था लागू है। उस समय कक्षा 1 से 5 तक 7000 रुपये, 6 से 8 तक 11400 रुपये प्रति छात्र प्रतिवर्ष प्रतिपूर्ति राशि तय की गई थी।

वहीं 2018 में कक्षा 9 से 12 को भी इसमें शामिल किया गया, जिसके लिए 15000 रुपये प्रति छात्र प्रति वर्ष निर्धारित किए गए। लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि तब से अब तक इन राशियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हाई कोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन

एसोसिएशन ने इस मामले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में भी उठाया था। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एसोसिएशन के अभ्यावेदन पर छह महीने के भीतर कार्रवाई की जाए।

हालांकि एसोसिएशन का आरोप है कि अभ्यावेदन देने के बावजूद सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके बाद 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया गया।

अन्य राज्यों से कम है प्रतिपूर्ति राशि

एसोसिएशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। कई राज्यों में यह राशि दोगुनी तक है और समय-समय पर संशोधित भी की जाती है, जबकि यहां वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है।

गरीब बच्चों की पढ़ाई पर संकट

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन हजारों गरीब और जरूरतमंद बच्चों पर पड़ेगा, जो RTE के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे थे। अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इस साल बड़ी संख्या में बच्चों का एडमिशन अटक सकता है।

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