आरक्षण पर विवादित पोस्ट से छत्तीसगढ़ में बवाल, ‘जनमन’ के संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी सेवा से हटाए गए
फेसबुक पोस्ट में आरक्षण को लेकर आपत्तिजनक भाषा के बाद बढ़ा विवाद, मामला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संज्ञान में भी पहुंचा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक पत्रिका ‘जनमन’ से जुड़े संपादकीय सलाहकार डॉ. अनिल द्विवेदी को आरक्षण को लेकर फेसबुक पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद सेवा से हटा दिया गया है। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध बढ़ने के बाद सरकार की ओर से यह कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी से सरकार नाराज थी। विवाद बढ़ने के बाद मामला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संज्ञान में भी पहुंचा। इसके बाद डॉ. अनिल द्विवेदी की ओर से संबंधित पोस्ट को फेसबुक से हटा दिया गया था।
क्या है पूरा मामला
डॉ. अनिल द्विवेदी ने हाल ही में अपने फेसबुक अकाउंट पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक विवादित पोस्ट की थी। पोस्ट में आरक्षण प्राप्त करने वाले लोगों के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया था।
इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आरक्षण समर्थकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों ने पोस्ट की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे सामाजिक सौहार्द के लिए अनुचित बताया।
विवाद बढ़ने के बाद हटाई गई पोस्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह प्रकरण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंचा। बताया गया कि सरकार ने पोस्ट की भाषा और उसके संभावित सामाजिक प्रभाव को गंभीरता से लिया।
मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद डॉ. अनिल द्विवेदी ने विवादित पोस्ट को फेसबुक से हटा दिया। हालांकि, तब तक पोस्ट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो चुका था।
सरकारी पद से जुड़े होने के कारण बढ़ा विवाद
डॉ. अनिल द्विवेदी का मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वह छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक पत्रिका ‘जनमन’ के संपादकीय सलाहकार पद से जुड़े हुए थे।
‘जनमन’ का संचालन जनसंपर्क विभाग से जुड़ा है और इस विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है। ऐसे में सरकारी तंत्र से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सरकार पर भी सवाल उठने लगे।
चरणदास महंत ने सरकार पर साधा निशाना
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट को आरक्षित वर्गों और संविधान का अपमान बताया था।
चरणदास महंत ने कहा था कि आरक्षण के जरिए संवैधानिक अधिकार हासिल करने वाले लोगों के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि केवल पोस्ट हटाना या खेद जताना पर्याप्त नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने यह सवाल भी उठाया था कि जनसंपर्क विभाग मुख्यमंत्री के पास होने के बावजूद सरकारी व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति की ऐसी टिप्पणी सामने कैसे आई। उन्होंने सरकार से इस मामले में जवाब देने की मांग की थी।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेश के अलग-अलग शहरों और कस्बों तक ले जाने की बात भी कही थी। पार्टी की ओर से सरकार पर आरक्षण और सामाजिक समानता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता बरतने की मांग की गई।
सरकार की कार्रवाई से विवाद थमने की उम्मीद
आरक्षण पर विवादित फेसबुक पोस्ट के बाद डॉ. अनिल द्विवेदी को सेवा से हटाए जाने की कार्रवाई सामने आई है। इस पूरे मामले ने छत्तीसगढ़ में आरक्षण, सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणी और सरकारी पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।
अब इस मामले में सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कार्रवाई के कारणों और आगे की प्रक्रिया को लेकर क्या जानकारी सामने आती है, इस पर नजर बनी हुई है।
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