Chhattisgarh Malaria Outbreak: छत्तीसगढ़ में मलेरिया का कहर! छात्रावास में दो छात्रों की मौत, 11 से ज्यादा बच्चे संक्रमित
Chhattisgarh Malaria Outbreak: बरसात के बीच कोरबा के छात्रावासों में मलेरिया का प्रकोप बढ़ा, दो छात्रों की मौत
Chhattisgarh Malaria Outbreak: क्या बरसात के साथ छत्तीसगढ़ में मलेरिया एक बार फिर जानलेवा बनता जा रहा है? कोरबा में दो छात्रों की मौत और 11 से ज्यादा बच्चों के संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आखिर कहां-कहां फैल रहा है संक्रमण और क्या है प्रशासन की तैयारी? जानिए पूरी रिपोर्ट।
Chhattisgarh Malaria Outbreak: छत्तीसगढ़ में मलेरिया का बढ़ता खतरा, कोरबा में दो छात्रों की मौत
बरसात का मौसम शुरू होते ही छत्तीसगढ़ में मलेरिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसी बीच कोरबा जिले से बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां अलग-अलग छात्रावासों में रहने वाले दो छात्रों की मलेरिया की चपेट में आने से मौत हो गई है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। वहीं छात्रावासों में रहने वाले बच्चों और उनके परिजनों के बीच चिंता का माहौल है।
11 से ज्यादा छात्र मिले मलेरिया पॉजिटिव
मिली जानकारी के अनुसार, कोरबा जिले के मर्दापोटी और इरादाह छात्रावासों में 11 से अधिक छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से दो छात्रों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका उपचार जारी है। संक्रमित छात्रों की संख्या बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोनों छात्रावासों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच अभियान शुरू कर दिया है। बच्चों की नियमित जांच के साथ उन्हें आवश्यक दवाइयां भी दी जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया विशेष अभियान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित छात्रावासों और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही है। मेडिकल टीम बुखार से पीड़ित छात्रों की जांच कर रही है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दवा वितरण, फॉगिंग और जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से मरीजों की स्थिति में सुधार संभव है, इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बिलासपुर में भी मिले मलेरिया के मरीज
कोरबा के अलावा बिलासपुर जिले में भी मलेरिया के मामले सामने आए हैं। औरापानी और नवाडीह गांव में चार बच्चों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। सभी बच्चों को बेहतर इलाज के लिए सिम्स अस्पताल, बिलासपुर रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच अभियान तेज कर दिया है। वहीं कलेक्टर ने भी हालात की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

पहले से संवेदनशील हैं कई गांव
गौरतलब है कि कोटा विकासखंड के 72 गांव पहले से ही मलेरिया प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं। हर साल बारिश के मौसम में यहां मलेरिया के मामलों में तेजी देखी जाती है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी रखता है और समय-समय पर रोकथाम अभियान चलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के दौरान जलभराव और मच्छरों की बढ़ती संख्या संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह बनती है।
बस्तर संभाग में भी बढ़ रहे मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 से अब तक बस्तर संभाग में 8,426 मलेरिया के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें 254 मरीज मिक्स मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 3,173 मरीज बीजापुर में मिले हैं। इसके अलावा सुकमा में 1,686, दंतेवाड़ा में 1,344, नारायणपुर में 896, बस्तर में 809, कोंडागांव में 329 और कांकेर में 189 मरीजों की पुष्टि हुई है। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
लोगों से की गई यह अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, घर के आसपास पानी जमा न होने दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। विभाग का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।
