रायपुर की मशरूम फैक्ट्री में मजदूरों से बंधुआ मजदूरी का खुलासा, 97 श्रमिकों को महिला एवं बाल विकास विभाग ने किया रेस्क्यू
रायपुर। राजधानी रायपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मशरूम फैक्ट्री में मजदूरों को बंधक बनाकर दिन-रात काम कराया जा रहा था। बिना मेहनताना दिए इनसे 24-24 घंटे तक काम लिया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने फैक्ट्री में छापा मार कार्रवाई की और 97 मजदूरों को मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। सभी मजदूरों ने फैक्ट्री मालिकों पर मारपीट, भूखा रखने और नजरबंद कर काम कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मजदूरों ने खुद बताई आपबीती
रेस्क्यू किए गए श्रमिकों ने जब आपबीती सुनाई तो सभी स्तब्ध रह गए। मजदूरों ने बताया कि उन्हें झांसा देकर फैक्ट्री तक लाया गया। कहा गया था कि मशरूम पैकिंग का आसान काम करना होगा, जिसमें हर दिन बैठकर 2,000 रुपये मिलेंगे और खाने-पीने, कपड़े आदि की पूरी व्यवस्था की जाएगी। लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद हालात कुछ और ही निकले। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें 24-24 घंटे लगातार काम करना पड़ता था, वह भी बिना किसी भुगतान के। कई बार उन्हें खाना भी नहीं दिया जाता था।
प्रताड़ना से तंग आकर मजदूर पहुंचे पुलिस तक
पूरा मामला तब सामने आया जब 2 जुलाई की रात कुछ मजदूर फैक्ट्री से भागने में कामयाब हुए। वे लगभग 20 किलोमीटर पैदल चलकर रायपुर पहुंचे, जहां स्थानीय लोगों की मदद से वे पुलिस के पास पहुंचे। इन मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में उन्हें अंदर बंद कर रखा जाता था, किसी से बात नहीं करने दी जाती थी और यदि कोई विरोध करता तो उसकी जमकर पिटाई होती थी। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी बेरहमी से पीटा जाता था।
महिला बाल विकास विभाग और NGO ने मिलकर की कार्रवाई
शिकायत की पुष्टि होते ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने गैर-सरकारी संस्था ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के साथ मिलकर खरोरा थाना क्षेत्र की मशरूम फैक्ट्री में छापा मारा। विभागीय अधिकारी शैल ठाकुर के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में यूपी, बिहार, झारखंड और मध्यप्रदेश से लाए गए कुल 97 मजदूरों को फैक्ट्री से मुक्त कराया गया।
मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
मजदूरों ने फैक्ट्री संचालकों – विकास तिवारी, विपिन तिवारी और नितेश तिवारी के खिलाफ रायपुर एसपी को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने फैक्ट्री में झेलनी पड़ी प्रताड़ना और अमानवीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
अब क्या होगी कार्रवाई?
महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और मामले को लेकर स्थानीय पुलिस तथा प्रशासन के साथ मिलकर आगे की जांच की जा रही है। विभाग का कहना है कि यदि मजदूरों के आरोप सही पाए गए, तो मालिकों पर बंधुआ श्रमिक अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
यह घटना ना सिर्फ मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में श्रमिकों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
