Bastar Tiranga Yatra: जहां कभी गूंजती थी माओवादियों की बंदूकें, अब लहराएगा तिरंगा! 2 हजार पूर्व माओवादी होंगे यात्रा में शामिल
Bastar Tiranga Yatra: बस्तर के दुर्गम गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा, अभियान में 2 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित माओवादी भी होंगे शामिल
Bastar Tiranga Yatra: बस्तर में इस बार सिर्फ तिरंगा नहीं लहराएगा, बल्कि माओवाद के साये से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ने की एक नई तस्वीर भी दिखाई देगी। जिन गांवों में कभी माओवादी प्रभाव के कारण राष्ट्रध्वज नहीं फहराया जा सका, वहां अब पहली बार तिरंगा पहुंचेगा। इस ऐतिहासिक अभियान में 2 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित माओवादी भी शामिल होंगे। आखिर किन गांवों में पहली बार फहरेगा तिरंगा और कैसे बदलेगी बस्तर की तस्वीर? जानिए पूरी कहानी।
Bastar Tiranga Yatra: माओवाद के गढ़ में पहली बार लहराएगा तिरंगा, 2 हजार पूर्व माओवादी भी होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न एक अलग ही अंदाज में मनाया जाएगा। बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के उन दूरदराज इलाकों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा, जो लंबे समय तक माओवादी हिंसा और प्रभाव के लिए जाने जाते रहे हैं। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक अभियान में 2 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित माओवादी भी हिस्सा लेंगे। सरकार इसे बस्तर में लोकतंत्र और राष्ट्रीय मुख्यधारा की मजबूत होती पकड़ के संकेत के तौर पर देख रही है।
इन गांवों में पहली बार फहरेगा राष्ट्रध्वज
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक इस वर्ष बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांवों में पहली बार राष्ट्रध्वज फहराया जाएगा।
इनमें कई ऐसे इलाके शामिल हैं, जिन्हें कभी माओवादी प्रभाव वाले बेहद संवेदनशील क्षेत्रों के तौर पर देखा जाता था। पूवर्ती, सिलगेर और दरभा जैसे इलाकों में तिरंगा फहराने को प्रशासन बस्तर में बदलते हालात की बड़ी तस्वीर के रूप में पेश कर रहा है।
सरकार का कहना है कि जो क्षेत्र कभी माओवादी हिंसा के कारण कुख्यात माने जाते थे, वे अब विकास और राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़कर नई पहचान की ओर बढ़ रहे हैं।
2 हजार से ज्यादा पूर्व माओवादी भी उठाएंगे तिरंगा
इस अभियान की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें 2 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित माओवादी भी शामिल होंगे। लंबे समय तक हिंसा के रास्ते पर रहे इन लोगों का तिरंगा यात्रा में शामिल होना बस्तर में बदलाव का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
सरकार के मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादी अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनका तिरंगा यात्रा का हिस्सा बनना हिंसा से लोकतंत्र की ओर बदलाव की तस्वीर पेश करेगा।
11 से 15 अगस्त तक चलेगा अभियान
बस्तर संभाग में 11 से 15 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान बाइक रैलियां, तिरंगा यात्राएं और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम होंगे।
भाजपा कार्यकर्ता और भारतीय जनता युवा मोर्चा के सदस्य माओवादी उन्मूलन अभियान में बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें तिरंगा भेंट कर सम्मानित भी कर रहे हैं।
500 से ज्यादा जगहों का होगा नामकरण
15 अगस्त को बस्तर संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, प्रमुख चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों और अमर बलिदानियों के नाम पर किए जाने की तैयारी है।
सरकार का कहना है कि इस पहल के जरिए नई पीढ़ी को उन जवानों के योगदान और बलिदान से परिचित कराया जाएगा, जिन्होंने बस्तर में शांति और सुरक्षा के लिए अपनी जान गंवाई।
10 अगस्त को रायपुर से होगा अभियान का आगाज
प्रदेश में तिरंगा यात्रा का औपचारिक शुभारंभ 10 अगस्त को रायपुर के मरीन ड्राइव से सुबह 10 बजे किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, मंत्री, जनप्रतिनिधि, छात्र, एनसीसी कैडेट्स, पूर्व सैनिक, खिलाड़ी और अलग-अलग समाजों के लोग शामिल होंगे।
बताया गया है कि प्रदेश की 450 से ज्यादा भाजपा मंडल इकाइयों के साथ ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और विकासखंड मुख्यालयों में भी तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी।

अरुण साव बोले- राष्ट्र निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता का अवसर
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इस अभियान को राष्ट्र निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर वर्ष 2022 से शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान युवाओं को राष्ट्रभक्ति से जोड़ने और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने का प्रयास है।
इस बार बस्तर के उन दुर्गम इलाकों तक भी तिरंगा पहुंचेगा, जहां आजादी के बाद से कभी राष्ट्रध्वज नहीं फहराया जा सका था। यही वजह है कि इस अभियान को बस्तर के बदलते माहौल और माओवादी हिंसा से लोकतांत्रिक मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी चलेगा ‘डिजिटल तिरंगा’ अभियान
तिरंगा यात्रा के साथ सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल तिरंगा’ अभियान भी चलाया जाएगा। लोगों से अपने घरों और संस्थानों में तिरंगा फहराने और उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की जाएगी।
ऐसे में इस बार बस्तर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन इलाकों में राष्ट्रीय ध्वज की नई मौजूदगी का प्रतीक बनने जा रहा है, जहां कभी हिंसा और माओवादी प्रभाव के कारण हालात बिल्कुल अलग थे।
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