छत्तीसगढ़ की धरती में छिपा है हीरों का खजाना? महासमुंद डायमंड ब्लॉक में बड़े सर्वे को मंजूरी

Baloda Belmundi Diamond Project

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल की बैठक में परियोजना के अगले चरण को स्वीकृति देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का फैसला लिया गया। इस प्रक्रिया के जरिए क्षेत्र में मौजूद हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा, जिससे भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन की संभावनाओं का रास्ता साफ हो सके।

हीरा भंडार का होगा वैज्ञानिक मूल्यांकन

बोर्ड बैठक में परियोजना की मौजूदा प्रगति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की गहराई और उसमें मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके बाद व्यावसायिक खनन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पहले ही मिल चुके हैं प्राकृतिक हीरे

इस परियोजना के तहत एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वे और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल को एनएमडीसी के पन्ना स्थित डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में परीक्षण के लिए भेजा गया। जांच के दौरान 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले, जिससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की पुष्टि हो चुकी है।

देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है छत्तीसगढ़

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के प्रमुख हीरा उत्पादक देशों जैसे बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी शुरुआती चरण में इसी तरह के संकेत मिले थे, जो बाद में बड़े व्यावसायिक भंडार में बदल गए। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

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अन्य खनन परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना है। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

पर्यावरण और स्थानीय विकास पर रहेगा विशेष फोकस

निदेशक मंडल ने स्पष्ट किया कि सभी खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना राज्य को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित करने की क्षमता रखती है और इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

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