Asaduddin Owaisi On Vande Mataram: ‘देश कोई देवी नहीं’, वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा दर्जा देने पर ओवैसी नाराज

Asaduddin Owaisi On Vande Mataram: वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने के फैसले पर AIMIM चीफ ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। संविधान और धर्मनिरपेक्षता का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हैदराबाद सांसद ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “देश कोई देवी नहीं है” और भारत उसके लोगों से बनता है।
राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। एक तरफ बीजेपी और उसके समर्थक इस फैसले को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों की ओर से इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मोदी कैबिनेट के फैसले पर बढ़ा विवाद
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram विवाद उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
सरकार ने इसके लिए ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार किया है। इस संशोधन के लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और उसके अपमान से जुड़े वही नियम लागू होंगे, जो फिलहाल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ पर लागू हैं।
सरकार के इस फैसले को पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक कदम माना जा रहा है।
ओवैसी ने क्या कहा?
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram को लेकर ओवैसी ने X पर लंबा पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि “वंदे मातरम एक देवी की स्तुति है। इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता।”
ओवैसी ने आगे कहा कि “जन गण मन भारत और उसके लोगों का उत्सव है, किसी विशेष धर्म का नहीं। धर्म राष्ट्र नहीं होता।”
उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का हवाला देते हुए कहा कि भारत “हम, लोग” से शुरू होता है, न कि “भारत माता” से। ओवैसी ने लिखा कि संविधान देश के नागरिकों को सोचने, बोलने, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता देता है।
बंकिम चंद्र चटर्जी पर भी उठाए सवाल
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram बयान में AIMIM प्रमुख ने ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को लेकर भी विवादित टिप्पणी की।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि बंकिम चंद्र चटर्जी ब्रिटिश शासन के समर्थक थे और मुसलमानों के प्रति उनकी सोच नकारात्मक थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर ने भी इसे राष्ट्रगान बनाने का समर्थन नहीं किया था।
हालांकि, ओवैसी के इन दावों पर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

संविधान का दिया हवाला
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram बयान में ओवैसी ने संविधान सभा की चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में कुछ सदस्यों ने प्रस्तावना को देवी या ईश्वर के नाम से शुरू करने की मांग की थी, लेकिन उन सभी संशोधनों को खारिज कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जो अपने नागरिकों से बनता है, किसी देवी-देवता से नहीं।
ओवैसी ने पोस्ट में लिखा, “इंडिया यानी भारत उसके लोग हैं। यह देश किसी देवी या देवता की संपत्ति नहीं है।”
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने ओवैसी के बयान का समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने उनकी आलोचना भी की।
बीजेपी समर्थकों ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया, वहीं कुछ लोगों ने कहा कि संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर बहस होना लोकतंत्र का हिस्सा है।
X और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #VandeMataram और #Owaisi ट्रेंड करने लगे।
क्या है ‘वंदे मातरम’ का इतिहास?
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram विवाद के बीच एक बार फिर ‘वंदे मातरम’ के इतिहास पर चर्चा शुरू हो गई है।
‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया गीत है। यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान काफी लोकप्रिय हुआ था और आजादी की लड़ाई में इसे राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में देखा गया।
हालांकि, इसके कुछ हिस्सों को धार्मिक प्रतीकों से जोड़कर भी देखा जाता रहा है, जिस कारण समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं।

सरकार के फैसले का क्या होगा असर?
Asaduddin Owaisi On Vande Mataram विवाद अब राजनीतिक और संवैधानिक बहस का रूप ले सकता है। यदि प्रस्तावित संशोधन लागू होता है, तो ‘वंदे मातरम’ के अपमान को लेकर भी वही कानूनी प्रावधान लागू होंगे जो राष्ट्रगान के लिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर नई बहस छिड़ सकती है।
राष्ट्रगीत, संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर देशव्यापी बहस शुरू कर दी है। केंद्र सरकार जहां इसे राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ रही है, वहीं ओवैसी जैसे नेता इसे धार्मिक प्रतीकवाद से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
अब देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को किस तरह लागू करती है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल कितना गरमाता है।
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