“साउथ अफ्रीका में यूसुफ का तूफ़ान – वो शतक जो हार में दब गया” – सेंचुरियन, 2011
खेल डेस्क: 2011 वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारत दक्षिण अफ्रीका दौरे पर था। पाँचवाँ और आख़िरी वनडे Centurion के मैदान पर खेला जा रहा था। सीरीज़ पहले ही अफ्रीका जीत चुका था, लेकिन भारत के लिए ये मुकाबला लाज बचाने का था। लक्ष्य था 268 रन।
भारत की लड़खड़ाती शुरुआत
पारी की शुरुआत में ही हालात बिगड़ गए।
0 पर रोहित शर्मा आउट – स्टेन की आउटस्विंगर ने चकमा दे दिया।
12 पर विराट कोहली कैच – मोर्कल की तेज़ बाउंसर पर फँस गए।
34 पर युवराज सिंह LBW – लेनवाबो सोसोबी ने पैड पर मार दिया।
42 पर कप्तान धोनी चलते बने – Botha की स्पिन में चूक गए।
60 तक आते-आते 5 विकेट गिर चुके थे।
ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा था। सबको लग रहा था कि ये मैच अब औपचारिकता बन चुका है। लेकिन तभी मैदान पर आया एक नाम – यूसुफ पठान।
स्टेन और मोर्कल के खिलाफ़ निडर हमला
सामने डेल स्टेन और मोर्ने मोर्कल– उस समय दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज थे।स्टेन 145+ kmph की रफ्तार से रिवर्स स्विंग निकाल रहे थे।मोर्कल लंबी कद-काठी से बाउंसर निकालकर बल्लेबाज़ों को बैकफुट पे धकेल के डरा रहे थे।लेकिन यूसुफ ने डरने से इनकार कर दिया।स्टेन की फुल लेंथ गेंद को सीधा लॉन्ग ऑनके ऊपर से छह।मोर्कल की बाउंसर को हुक कर डीप स्क्वायर लेग में दर्शकों के बीच भेजा।स्टेन की यॉर्कर को भी बल्ले का पूरा चेहरा दिखाकर मिडविकेट बाउंड्री पार करा दिया।
उनकी बल्लेबाज़ी किसी तूफ़ान से कम नहीं थी। मैदान पर हर शॉट ये बता रहा था कि यूसुफ “fearless striker” हैं।
68 गेंदों पर 105 रन
यूसुफ ने सिर्फ़ 68 गेंदों पर 105 रन बना डाले। 8 चौके , 7 गगनचुंबी छक्के..उन्होंने स्टेन और मोर्कल जैसे गेंदबाज़ों को जिस तरह से कूटा, वो उस समय किसी भी बल्लेबाज़ के लिए आसान नहीं था।
हार का दर्द
जैसे-जैसे यूसुफ रन बना रहे थे, भारत की उम्मीदें बढ़ती जा रही थीं। एक वक्त लगा कि शायद वो अकेले ही मैच जीत देंगे। लेकिन दूसरी तरफ विकेट गिरते रहे। आखिरकार पूरी टीम 234 पर ऑलआउट हो गई। यूसुफ की लड़ाई अधूरी रह गई और भारत हार गया।
इस पारी की अहमियत
ये यूसुफ पठान का दूसरा और आख़िरी वनडे शतक था।स्टेन और मोर्कल जैसे गेंदबाजों पर इस तरह का अटैक क्रिकेट की दुनिया के लिए चौंकाने वाला था।इस पारी ने दिखाया कि यूसुफ सिर्फ़ slogger नहीं, बल्कि एक गंभीर मैच विनर हैं।
वर्ल्ड कप 2011 की राह
इसी पारी ने यूसुफ की किस्मत बदल दी।2011 वर्ल्ड कप से ठीक पहले सिलेक्टर्स के सामने बड़ा सवाल था – इरफान पठान या यूसुफ पठान। इरफान एक genuine all-rounder थे, लेकिन पिछले कुछ समय से लय में नहीं थे। दूसरी तरफ युफुफ ने सेंचुरियन में अपने बल्ले से साफ संदेश दे दिया था – “मैं मैच का रुख अकेले मोड़ सकता हूँ।”
नतीजा ये हुआ कि World Cup 2011 squad में यूसुफ को जगह मिली और इरफान बाहर रह गए।
नतीजा
आज जब वर्ल्ड कप 2011 की जीत की कहानियाँ सुनाई जाती हैं तो लोग ज़्यादातर धोनी का छक्का या युवराज के six-hitting याद करते हैं। लेकिन असली क्रिकेट प्रेमियों के लिए सेंचुरियन की वो पारी हमेशा एक “Forgotten Cricket Classic – Lost Cause Special” रहेगी।
राइटर:

“गेंद के घूमने से लेकर बल्ले के स्विंग तक, मैं क्रिकेट की हर परत को उधेड़ता हूँ।
‘Cricket’s Forgotten Classics’ के ज़रिए, मैं भूली-बिसरी पारियों, ऐतिहासिक लम्हों और अद्भुत किस्सों को नई ज़िंदगी देता हूँ।
मेरे लिए क्रिकेट महज़ एक खेल नहीं—ये एक टाइम मशीन है, जो हमें इतिहास की पिच से जोड़कर वर्तमान के स्कोरबोर्ड तक ले आती है।”
📧 nagendra.forgottenclassics@gmail.com
🌐 www.youthwings.in
📸 Instagram: @nagendra_brahmbhatt
