कपिल देव की भूली-बिसरी पारी: नागपुर में 64 गेंदों पर 87 रन, जब जीत हाथ से फिसल गई, वर्ल्ड कप के बाद की वापसी की कोशिश
कपिल देव
1983 वर्ल्ड कप में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 175* रन की ऐतिहासिक पारी कपिल देव के करियर का सुनहरा पल रही। लेकिन 8 दिसंबर 1987 को नागपुर में खेली गई उनकी 87 रन की पारी भी क्रिकेट इतिहास के पन्नों में दर्ज होनी चाहिए थी—बस जीत न मिलने की वजह से यह लगभग भुला दी गई।
वर्ल्ड कप 1987 के सेमीफाइनल में हार के बाद कपिल से कप्तानी छिन गई थी और दिलीप वेंगसरकर कप्तान बने थे। वेस्टइंडीज़ ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 203 रन बनाए, कपिल ने 7 ओवर में सिर्फ 13 रन देकर एक विकेट लिया।
विवादास्पद आउट और तनाव का माहौल
चेज़ के दौरान स्कोर 31/5 था। इस बीच वेंगसरकर का आउट होना विवाद का कारण बना। अंपायर राजन मेहता ने ‘नॉट आउट’ दिया, लेकिन विव रिचर्ड्स के दबाव में स्क्वायर-लेग अंपायर विक्रमराजू ने फैसला बदल दिया। इस घटना ने मैच का माहौल गरमा दिया।
कपिल का तूफ़ानी जवाब
नंबर 7 पर आए कपिल देव ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विंस्टन बेंजामिन, विव रिचर्ड्स और कार्ल हूपर की गेंदबाज़ी पर जमकर प्रहार किया।
रवि शास्त्री के साथ उन्होंने 113 रन की साझेदारी की। कपिल ने महज़ 64 गेंदों में 87 रन ठोके, जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल थे। स्ट्राइक रेट करीब 136—उस दौर में ODI क्रिकेट में यह अद्भुत था।
मैच का रुख और हार का दर्द
जब जीत की उम्मीदें बढ़ रही थीं, पैट्रिक पैटरसन ने कपिल और शास्त्री दोनों को आउट कर दिया और 6/29 के करियर बेस्ट आंकड़े दर्ज किए। भारत 193 रन पर ऑलआउट हो गया और 10 रन से मैच हार गया।
क्यों याद रखी जानी चाहिए यह पारी
जज़्बा: 31/5 से टीम को संभालना
आक्रामकता: तेज़ और स्पिन गेंदबाज़ी दोनों पर समान दबदबा
अनदेखी उपलब्धि: जीत न मिलने के कारण इतिहास में गुम

“गेंद के घूमने से लेकर बल्ले के स्विंग तक, मैं क्रिकेट की हर परत को उधेड़ता हूँ।
‘Cricket’s Forgotten Classics’ के ज़रिए, मैं भूली-बिसरी पारियों, ऐतिहासिक लम्हों और अद्भुत किस्सों को नई ज़िंदगी देता हूँ।
मेरे लिए क्रिकेट महज़ एक खेल नहीं—ये एक टाइम मशीन है, जो हमें इतिहास की पिच से जोड़कर वर्तमान के स्कोरबोर्ड तक ले आती है।”
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