कौन हैं अनीता आडवाणी? राजेश खन्ना से रिश्ते को शादी का दर्जा दिलाने की लड़ाई, अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को कानूनी शादी का दर्जा देने की मांग करने वाली अभिनेत्री अनीता आडवाणी की विशेष याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की संयुक्त पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के इस फैसले के साथ ही दिवंगत अभिनेता की पत्नी डिंपल कपाड़िया, दामाद अक्षय कुमार और बेटियों ट्विंकल खन्ना व रिंकी खन्ना को करीब 14 वर्षों से चली आ रही कानूनी खींचतान में अंतिम राहत मिल गई है।

डिंपल कपाड़िया और अक्षय कुमार समेत परिवार को बनाया था पक्षकार

अनीता आडवाणी ने अपनी याचिका में दिवंगत अभिनेता की पत्नी डिंपल जतिन खन्ना, दामाद अक्षय कुमार और दोनों बेटियों ट्विंकल राजीव भाटिया व रिंकी समीर शरण को प्रतिवादी बनाया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह अभिनेता के साथ लंबे समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रही थीं, जिसे वैवाहिक संबंध जैसा दर्जा दिया जाना चाहिए और इसके आधार पर उन्हें अभिनेता की संपत्ति में हिस्सा तथा रहने के लिए घर प्रदान किया जाए।

निचली अदालतों ने भी खारिज कर दिए थे सभी दावे

इस मामले की कानूनी शुरुआत मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट से हुई थी, जिसने वर्ष 2017 में ही अनीता आडवाणी के मुकदमे को खारिज कर दिया था। सिविल कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि जब राजेश खन्ना का निधन हुआ, उस वक्त डिंपल कपाड़िया के साथ उनका कानूनी विवाह वैध रूप से कायम था। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी अन्य समानांतर रिश्ते को कानूनी विवाह की मान्यता नहीं दी जा सकती। इस आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई अपील को बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी 1 अप्रैल को खारिज कर दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी यथावत बरकरार रखा है।

2012 से चल रही थी कानूनी खींचतान

हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का निधन जुलाई 2012 में हुआ था। उनके देहांत के फौरन बाद अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि वह बांद्रा स्थित उनके ऐतिहासिक बंगले ‘आशीर्वाद’ में अभिनेता के साथ वर्षों तक सह-जीवन में रही थीं और अभिनेता के निधन के बाद उन्हें बंगले से बेदखल कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने परिवार पर घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था। हालांकि वर्ष 2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस मामले को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि यह संबंध घरेलू हिंसा कानून के तहत ‘वैवाहिक प्रकृति’ का नहीं माना जा सकता। बांद्रा का वह बंगला पहले ही बेचा जा चुका है और अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम आदेश के बाद कानूनी दावों का यह लंबा दौर पूरी तरह समाप्त हो गया है।

Youthwings