ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू: ADM सीबी प्रसाद 7 दिन में देंगे रिपोर्ट
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने इस दर्दनाक घटना की औपचारिक तौर पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) सीबी प्रसाद को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच अधिकारी को पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल कर सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
5 दुकानों को रौंदते हुए मंदिर के मुख्य द्वार में घुसा था ट्रक
यह दर्दनाक हादसा 17 और 18 अक्टूबर की दरमियानी रात नवरात्रि पर्व के दौरान हुआ। चीनौर रोड की तरफ से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया और उसने सड़क किनारे सजी प्रसाद की पांच दुकानों को टक्कर मार दिया। इसके बाद बेकाबू वाहन सीधे मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से जाकर टकरा गया। इस भीषण दुर्घटना में कुल 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें 11 पुरुष, 2 महिलाएं और 18 वर्ष से कम उम्र के 2 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा 27 से अधिक श्रद्धालु और स्थानीय दुकानदार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका उपचार जारी है।
इन अहम बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी प्रशासनिक जांच
कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, मजिस्ट्रियल जांच के तहत कई संवेदनशील पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। जांच अधिकारी एडीएम सीबी प्रसाद को यह स्पष्ट करना होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, प्रतिबंधित और भीड़भाड़ वाले इलाके में तेज रफ्तार ट्रक घटनास्थल तक कैसे पहुंच गया, और क्या इस पूरे मामले में पुलिस या यातायात प्रबंधन के स्तर पर कोई गंभीर चूक हुई थी। जांच के आधार पर प्रशासनिक और सुरक्षा खामियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
7 दिन में सामने आएगी रिपोर्ट, भविष्य के लिए मांगे गए सुरक्षा उपाय
जांच अधिकारी को केवल हादसे के कारणों और दोषियों की पहचान करने तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षात्मक सुझाव भी देने होंगे। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलते ही दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे शहर और पीड़ित परिवारों की निगाहें सात दिन के भीतर पेश होने वाली इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
