Shardiya Navratri 2026 Day 5: आज मां स्कंदमाता की पूजा में न करें ये गलती! जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और प्रिय भोग

Shardiya Navratri 2026 Day 5: Shardiya Navratri का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है। इस साल 15 अक्टूबर, गुरुवार को मां स्कंदमाता की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। संतान सुख की कामना करने वाले भक्त भी माता की विशेष पूजा करते हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और भोग अर्पित करने की परंपरा है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और प्रिय भोग के बारे में।

कौन हैं मां स्कंदमाता? जानें उनका स्वरूप

मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है, इसलिए उनकी माता को स्कंदमाता कहा जाता है। माता की चार भुजाएं हैं और उनकी गोद में बालरूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। उनका वाहन सिंह माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में मां स्कंदमाता को ममता, वात्सल्य और संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनसे परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन की परेशानियों से लड़ने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।

मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग संबंधी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंचमी तिथि 14 अक्टूबर की रात 1:14 बजे से 15 अक्टूबर की रात 3:26 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए सुबह 7:32 से 7:47 बजे और सुबह 10:15 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक का समय बताया गया है। दोपहर 2:30 से शाम 4 बजे तक राहुकाल रहेगा।

ध्यान दें: पूजा के मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं। अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लें।

मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें?

Shardiya Navratri के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें।
  • लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें।
  • माता का ध्यान करके पीले फूल और पूजा सामग्री अर्पित करें।
  • परंपरा के अनुसार इलायची, लौंग और पान का पत्ता चढ़ाएं।
  • मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ या व्रत कथा का श्रवण करें।
  • अंत में माता की आरती करके प्रसाद वितरित करें।

पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार भी की जा सकती है।

मां स्कंदमाता का प्रिय भोग क्या है?

Shardiya Navratri के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले, पीले रंग की मिठाई और केसर की खीर का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मौसमी फल और सात्विक प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि मां को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जाता है।

मां स्कंदमाता का मंत्र

मां स्कंदमाता की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:

मंत्र:

“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥”

इसके अलावा मां दुर्गा के मातृस्वरूप की स्तुति के लिए यह मंत्र भी पढ़ा जाता है:

“या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप करके माता का स्मरण कर सकते हैं।

मां स्कंदमाता की व्रत कथा: तारकासुर का अंत कैसे हुआ?

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक असुर ने ब्रह्माजी से ऐसा वरदान प्राप्त किया था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकता था। उस समय शिवजी तपस्या में लीन थे। वरदान के प्रभाव से तारकासुर का अत्याचार बढ़ने लगा और देवता परेशान हो गए।

इसके बाद देवताओं ने शिवजी और माता पार्वती के विवाह तथा उनके पुत्र के जन्म के लिए प्रार्थना की। भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ और माता पार्वती ने उन्हें युद्धकला का ज्ञान दिया। आगे चलकर कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध किया।

मान्यता है कि माता पार्वती का अपने पुत्र स्कंद को गोद में धारण करने वाला स्वरूप ही मां स्कंदमाता कहलाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन उनकी पूजा कर भक्त सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

Shardiya Navratri के पांचवें दिन क्यों खास है मां स्कंदमाता की पूजा?

मां स्कंदमाता का स्वरूप मातृत्व, प्रेम और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करके परिवार की खुशहाली और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं।l

इस दिन पूजा के साथ मंत्र जाप, कथा श्रवण और आरती करने की परंपरा है। श्रद्धालु माता को प्रिय भोग अर्पित करके उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

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