राहुल गांधी देश को बताएं सच! सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट विवाद पर बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पूछे 3 सवाल

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के पुराने मतदाता सूची विवाद को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राहुल गांधी से इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। भंडारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा कि जब सोनिया गांधी को उस समय तक भारत की नागरिकता ही नहीं मिली थी, तब 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम कैसे दर्ज कर लिया गया था।

‘राहुल गांधी देश के सामने आकर दें जवाब’

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक त्रुटि का मामला नहीं है, बल्कि देश के नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा एक बड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश की जनता को बताना चाहिए कि उस दौर में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए क्या प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन हुआ था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उस समय सत्ता या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के प्रभाव का इस्तेमाल करके यह काम करवाया गया था। भंडारी ने जोर देकर कहा कि इस पूरे प्रकरण की तह तक निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

नागरिकता मिलने से पहले नाम जुड़ने पर उठाए सवाल

बीजेपी प्रवक्ता ने मामले के कानूनी बिंदुओं का हवाला देते हुए बताया कि सोनिया गांधी को आधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता मिली थी। इसके बावजूद उनका नाम नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वर्ष 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था। शिकायत के अनुसार 1980 में नाम आने के बाद उसे 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा शामिल किया गया। बीजेपी ने कहा कि बिना नागरिकता के किसी भी व्यक्ति का नाम देश की वोटर लिस्ट में शामिल होना नियमों का सीधा उल्लंघन है और कांग्रेस नेतृत्व को इस पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।

अदालत में फिर से खुला मामला, 29 सितंबर को होगी सुनवाई

बीजेपी की यह तीखी प्रतिक्रिया दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत के उस अहम फैसले के बाद सामने आई है, जिसमें मामले की नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए गए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा एफआईआर की मांग वाली याचिका खारिज करने के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने माना कि पिछले आदेश में पर्याप्त कानूनी कारण नहीं दिए गए थे और न ही पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मंगाई गई थी। अब यह मामला दोबारा मजिस्ट्रेट कोर्ट में पहुंच गया है, जहां 29 सितंबर को इस पर अगली सुनवाई होगी।

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