महंगाई का एक और झटका! पेट्रोल 340 के पार, डीजल ने भी पार किया 368 का आंकड़ा

पेट्रोल-डीजल

ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानियां एक बार फिर बढ़ा दी हैं। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) के दाम में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के मुताबिक पेट्रोल 3.81 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है, जबकि हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 3.59 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद पेट्रोल की कीमत 340 रुपये के आंकड़े को पार कर गई है, जबकि डीजल 368 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गया है।

पेट्रोल की कीमत 341 रुपये के पार

नई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 341.59 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं हाई-स्पीड डीजल अब 368.29 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। लगातार बढ़ते ईंधन के दामों का सीधा असर लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर पड़ रहा है।

इससे पहले भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। 21 अगस्त को पेट्रोल के दाम में 27 पैसे और डीजल की कीमत में 1.64 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई थी। यानी कम समय में ही उपभोक्ताओं पर ईंधन महंगा होने का दोहरा दबाव पड़ा है।

पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स का बोझ

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ सरकार की ओर से लगाए जाने वाले टैक्स और लेवी भी अहम भूमिका निभाते हैं पेट्रोलियम डिवीजन के अनुसार, पेट्रोल पर करीब 114 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर टैक्स एवं लेवी वसूली जा रही है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

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महंगे ईंधन से बढ़ सकता है रोजमर्रा का खर्च

पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन की लागत भी बढ़ती है। इसका असर धीरे-धीरे सब्जियों, अनाज, किराना और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। वहीं, सार्वजनिक परिवहन के किराए में बढ़ोतरी होने पर आम लोगों का मासिक बजट और बिगड़ सकता है। लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण पहले से महंगाई का सामना कर रहे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ने की आशंका है।

अब रोज तय होंगी ईंधन की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईंधन की कीमतों की समीक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले कीमतों की समीक्षा 15 दिनों के अंतराल पर की जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, अब ईंधन की कीमतों को दैनिक आधार पर तय किया जा सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर तेजी से दिखाई दे सकता है।

आम जनता पर बढ़ा आर्थिक दबाव

पेट्रोल और डीजल की कीमतों का 340 और 368 रुपये के पार पहुंचना आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से परिवहन से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक हर स्तर पर खर्च बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी टैक्स नीति पर सबकी नजर रहेगी। अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो घरेलू स्तर पर भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

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