“रिस्क मेरा… रील तुम्हारी! स्टूडेंट्स का आंदोलन किसी फ्लॉप पार्टी के कमबैक के लिए नहीं” राघव चड्ढा ने किसे सुनाई खरी-खरी?
AAP छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद एंटी-पेपर लीक बिल पर जोरदार समर्थन, विपक्ष पर तंज… संसद से पास हुआ सख्त कानून
पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को संसद के ऊपरी सदन में भाजपा की तरफ से अपना पहला भाषण देते हुए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ का पुरजोर समर्थन किया। अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए चड्ढा ने इस मौके पर नई पार्टी की तरफ से जमकर बैटिंग की और विपक्षी दलों पर कड़ा हमला बोला।
लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी यह विधेयक पास हो गया, जिससे इसे संसद की मंजूरी मिल गई। यह भारत का पहला व्यापक एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क माना जा रहा है। विधेयक में प्रश्न पत्र लीक या अनुचित साधन अपनाने पर व्यक्तियों को न्यूनतम पांच साल (अधिकतम 10 साल) की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना तय किया गया है। जांच दो महीने और मुकदमा तीन महीने में पूरा करने के साथ फास्ट-ट्रैक अदालतों का भी प्रावधान है।
“कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं होता”
चड्ढा ने कहा, “पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का परमानेंट इलाज करना होगा। जैसे कैंसर का इलाज क्रोसिन खिलाकर नहीं किया जा सकता, ठीक वैसे ही पेपर लीक का इलाज मीडिया साउंड-बाइट से नहीं बल्कि संस्थागत समाधान से होगा। आज हमारी सरकार इस बिल के माध्यम से भारत का पहला एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क ला रही है।”
उन्होंने स्टूडेंट्स के गुस्से को जायज बताया और कहा कि 22 लाख बच्चे रोज 18 घंटे मेहनत करते हैं, लेकिन एक व्हाट्सएप मैसेज या टेलीग्राम पर पीडीएफ से सब बर्बाद हो जाता है। “सरकार ने सुना, कार्रवाई की और डिलीवर किया,” चड्ढा ने जोर दिया।
विपक्ष पर सीधा हमला
चड्ढा ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “स्टूडेंट्स की आवाज मायने रखती है, उनकी मांगें जायज हैं। प्रोटेस्ट करना, सवाल पूछना, शांतिपूर्ण मार्च निकालना ये सब उनका संवैधानिक अधिकार है। लेकिन यह प्रोटेस्ट स्टूडेंट का ही रहे, किसी राजनीतिक पार्टी की रैली न बन जाए। वे अपना माइक किसी को आउटसोर्स न करें।”
आगे उन्होंने तंज कसा, “स्टूडेंट्स की लड़ाई परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की है, लेकिन नेताओं की लड़ाई अपनी सोशल मीडिया रीच बढ़ाने की है। जब नेता स्टूडेंट्स को बैरिकेड्स के आगे भेजकर खुद कैमरे के सेफ साइड पर रहें, तो उनसे पूछिए रिस्क मेरा और रील तुम्हारी, ये पार्टनरशिप कैसी? यह आंदोलन स्टूडेंट्स के भविष्य के लिए है, किसी फ्लॉप पार्टी के कमबैक के लिए नहीं। जिस दल को अपने भविष्य का अता-पता नहीं, वो स्टूडेंट्स के भविष्य की क्या लड़ाई लड़ेगा?”
उन्होंने साफ कहा, “यह लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं, बल्कि मैरिट बनाम माफिया और मेहनत बनाम सेटिंग की है। स्टूडेंट्स को न्याय चाहिए, पार्टी को फुटेज.. स्टूडेंट्स को सुरक्षित परीक्षा चाहिए, पार्टी को वायरल क्लिप।”
भूमिका बदली, सवाल से समाधान तक
चड्ढा ने अपनी चुप्पी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष में उनका काम सवाल पूछना था, अब सत्ता पक्ष में समाधान ढूंढना है। भाषण वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा“स्टूडेंट्स बोलेंगे, सरकार सुनेगी, सिस्टम बदलेगा। स्टूडेंट्स जीतेंगे, माफिया हारेगा। जय हिंद।”
यह भाषण एनईईटी पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच आया, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी थी। सरकार ने री-एग्जाम, सीबीआई जांच और कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षा जैसी कई पहल का जिक्र करते हुए बिल को युवाओं के हित में बताया।
