MP Vidhan Sabha Monsoon Session 2026 : किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस का धरना, UCC विधेयक पर सियासी घमासान…
कांग्रेस ने खाद-बीज- MSP पर सरकार को घेरा, CM मोहन यादव बोले- UCC समेत बड़े विधेयक पेश होंगे, विपक्ष ने UCC को ‘धोखा’ बताया
भोपाल : मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत आज हुई। सत्र के पहले दिन विपक्षी कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने की तैयारी में है। यह दिन प्रदेश की राजनीति में ऐतिहासिक बन सकता है, लेकिन किसानों के मुद्दे और UCC पर सियासी तकरार ने इसे विवादास्पद भी बना दिया है।
सत्र शुरू होते ही कांग्रेस का प्रदर्शन
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के सभी विधायकों ने गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने खाद, बीज की कमी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कर्ज माफी, सोयाबीन और मूंग की खरीद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में किसानों को खाद नहीं मिल रही, केवल टोकन बांटे जा रहे हैं। सोयाबीन, मूंग और गेहूं उत्पादक किसान परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय भाजपा किसानों से वोट मांगती है, लेकिन MSP, फसल खरीद और किसानों के हितों पर सरकार पीछे हट जाती है। सिंघार ने सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की।
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने जवाब दिया कि प्रदेश में किसानों के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध है। टोकन वाले किसानों को नियमानुसार खाद दी जाएगी और किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
CM मोहन यादव- आज का दिन ऐतिहासिक
विधानसभा पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि आज का दिन मध्य प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है। सरकार आज समान नागरिक संहिता (UCC) सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेगी। CM ने इसे स्वतंत्रता के बाद प्रदेश के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताया और जनहित व सुशासन से जुड़े बड़े फैसलों का जिक्र किया।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने UCC को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि इससे सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार मिलेंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा गौर ने भी UCC को विकास और समान न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कांग्रेस का UCC पर तीखा विरोध
कांग्रेस ने UCC का खुलकर विरोध किया। विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि ट्राईबल विधायकों को इस मुद्दे को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों के साथ धोखा किया जा रहा है। सदन में उन्होंने रामेश्वर शर्मा के बयान पर पलटवार भी किया।
विधायक आतिफ अकील काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे और UCC विरोध की तख्तियां लेकर आए। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी की। अकील ने कहा कि बाबा साहब के अनुच्छेद 25-26 के तहत सभी धर्मों को आजादी दी गई है। आदिवासी वर्ग को बाहर रखा गया है, उसी तरह मुसलमानों को भी UCC से बाहर रखा जाए।
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 2026 सामान्य रूप से जुलाई-अगस्त में होता है। आज का दिन दो बड़े मुद्दों किसानी संकट और UCC पर केंद्रित रहा।
किसानों के मुद्दे की वास्तविकता
मध्य प्रदेश सोयाबीन, गेहूं और मूंग का प्रमुख उत्पादक राज्य है। विपक्ष का आरोप है कि खाद-बीज की कमी से बुआई प्रभावित हो रही है और MSP पर खरीद में देरी है। सरकार दावा करती है कि पर्याप्त स्टॉक है और टोकन सिस्टम के तहत वितरण हो रहा है। यह मुद्दा पिछले सत्रों में भी उठा है। कांग्रेस इसे चुनावी वादों (कर्ज माफी, MSP गारंटी) से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रही है।
UCC का महत्व
UCC (Uniform Civil Code) भाजपा की पुरानी मांग है, जो संविधान के अनुच्छेद 44 पर आधारित है। Uttarakhand पहले लागू कर चुका है। MP में UCC विधेयक पेश होना ऐतिहासिक कदम होगा, जो विवाह, विरासत, तलाक आदि में समान कानून लाएगा। सरकार इसे “समान न्याय” बता रही है, लेकिन कांग्रेस और अल्पसंख्यक इसे “धोखा” और आदिवासी-मुस्लिम अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।
सरकार UCC विधेयक पास कराने की कोशिश करेगी। कांग्रेस सदन में स्थगन प्रस्ताव ला सकती है। किसानों के मुद्दे पर यदि कोई राहत पैकेज घोषित हुआ तो तनाव कम हो सकता है।
20 जुलाई 2026 का दिन मध्य प्रदेश राजनीति में याद रखा जाएगा। एक तरफ किसानों की जमीनी समस्याएं, दूसरी तरफ UCC जैसा दूरगामी कानूनी बदलाव। सरकार को न सिर्फ विधेयक पास करने हैं, बल्कि किसानों को त्वरित राहत भी देनी है। विपक्ष को रचनात्मक आलोचना करनी चाहिए, न कि सिर्फ विरोध।
प्रदेश की जनता दोनों मुद्दों पर नजर रखेगी क्या UCC समानता लाएगा या विभाजन बढ़ाएगा? और क्या किसान संकट का समाधान होगा? सदन की कार्यवाही पर नजर बनाए रखें।
