गड़े खजाने के लिए नरबलि? 8 लोगों की ली जान.. 21 का पूरा करना था आंकड़ा! छत्तीसगढ़ के गांव की खौफनाक कहानी

गांव में चार महीनों में हुई आठ संदिग्ध मौतों के बाद ग्रामीणों ने गड़े खजाने और नरबलि की साजिश का आरोप लगाया है।

 

बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में महानदी के किनारे बसे पुराना खर्वे गांव ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। महज 800 लोगों की आबादी वाले इस शांत गांव में पिछले चार महीनों में आठ संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि गांव के किराना दुकानदार रामसाय जायसवाल ने गड़े खजाने को निकालने के लिए 21 लोगों की नरबलि देने की साजिश रची थी। इसमें आठ मौतें हो चुकी हैं और 13 और जानें खतरे में बताई जा रही हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि फरवरी से मई 2026 के बीच हुई ये मौतें बिल्कुल संदिग्ध हैं। सभी मृतक पूरी तरह स्वस्थ थे। उनकी मौत शराब पीने के कुछ घंटों बाद हुई। मृतकों में बद्री प्रसाद पटेल, बतुलू साहू, छत्तूराम साहू, बुधराम जायसवाल, विनोद साहू, गजानंद मांझी, चैतूराम साहू और महेतरू साहू शामिल हैं। इनकी उम्र 38 से 62 साल के बीच थी।

 

ग्रामीण कार्तिक प्रजापति ने पुलिस को बताया कि 14 मई को रामसाय जायसवाल ने उसे आधी बोतल शराब दी। पीते ही वह बेहोश हो गया और आठ घंटे बाद अस्पताल में उसकी जान बच सकी। दूसरे ग्रामीण उमेश नवरंगे ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे एक मृतक का शव बुलडोजर से गायब करने का ऑफर दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि रामसाय शराब में सुहागा जैसे जहरीले पदार्थ मिलाकर लोगों को पिलाता था।

 

सबसे हैरान करने वाली बात अंधविश्वास है। गांव में चर्चा है कि रामसाय किसी तांत्रिक के कहने पर खजाना निकालने के लिए 21 लोगों की बलि देने की योजना बना रहा था। आठ मौतें हो चुकी हैं, यानी और 13 बलियां बाकी थीं। ग्रामीण बताते हैं कि आरोपी अक्सर खजाने की बात करता था और तांत्रिक क्रियाओं में गहरा विश्वास रखता था।

 

बलौदाबाजार पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अब तक सात शवों को कब्र से निकालकर फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम के लिए रायपुर भेजा गया है। बलौदाबाजार के एसपी ओ.पी. शर्मा ने कहा कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। एसडीओपी कसडोल कौशल किशोर वासनिक ने बताया कि टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट और फॉरेंसिक सबूत आने के बाद ही मौतों का सही कारण सामने आएगा। रामसाय जायसवाल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और वह सभी आरोपों से इनकार कर रहा है।

 

यह मामला छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास, काला जादू, तांत्रिक मान्यताओं और अशिक्षा की गहरी समस्या को उजागर करता है। एक छोटे से गांव में इतनी मौतें होने के बावजूद शुरुआत में उचित जांच न होना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही की ओर इशारा करता है। जहरीली शराब की अवैध बिक्री, खजाने की लालच और नरबलि जैसी अंधी मान्यताएं आज भी दूरदराज के क्षेत्रों में मौजूद हैं।

 

पुलिस की तेज कार्रवाई और शवों को निकालकर वैज्ञानिक जांच शुरू करना सराहनीय कदम है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह सुनियोजित हत्याओं का गंभीर मामला बन जाएगा। कई परिवार अब सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

 

इस घटना से साफ है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अंधविश्वास मुक्ति अभियान, शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को और तेज करने की जरूरत है। शराब की अवैध बिक्री पर सख्त निगरानी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी है।

 

पुराना खर्वे गांव की यह घटना मात्र आठ मौतों की कहानी नहीं है। यह आधुनिकता और अंधविश्वास के बीच चल रही जंग का जीवंत उदाहरण है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने तक पूरा प्रदेश इस रहस्यमयी मामले पर नजरें जमाए हुए है।

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