दुर्ग पुलिस पर उठे बड़े सवाल: चालान के बदले रिश्वत और आरोपी से गले मिलते दिखे पुलिस

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की पुलिस एक बार फिर विवादों में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने न सिर्फ पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी झटका दिया है। एक तरफ ट्रैफिक विभाग का सब इंस्पेक्टर कथित रूप से चालान के बदले कैश लेते दिखाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामले के आरोपी से वर्दीधारी कॉन्स्टेबल का दोस्ताना अंदाज लोगों को हैरान कर रहा है।
अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए सख्त है? क्या सिस्टम में “सेटिंग” का खेल इतना मजबूत हो चुका है कि वर्दी का डर खत्म होता जा रहा है?
सड़क पर चालान या खुली वसूली?
पहला वीडियो दुर्ग ट्रैफिक विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर महेश्वर देवांगन सड़क किनारे एक युवक से बातचीत करते नजर आते हैं। कुछ ही सेकंड बाद युवक उन्हें पैसे देता दिखाई देता है। वीडियो में कथित तौर पर यह आवाज भी सुनाई देती है कि अधिकारी युवक से पैसे गिनने के लिए कह रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह वैध चालान था तो पैसे सड़क किनारे हाथों-हाथ क्यों लिए गए? क्या चालान मशीन खत्म हो गई थी? क्या ऑनलाइन पेमेंट व्यवस्था सिर्फ दिखावे के लिए है?
आज सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन सड़क पर वर्दीधारी अधिकारी अगर खुलेआम नकद लेता दिखाई दे, तो जनता आखिर किस पर भरोसा करे?
वीडियो वायरल होने के बाद ट्रैफिक टीआई टीडी चंद्रा ने कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर को लाइन अटैच कर दिया। लेकिन क्या केवल लाइन अटैच करना काफी है? क्या इससे जनता का भरोसा वापस आ जाएगा? लोग सोशल मीडिया पर यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसे मामलों में सख्त विभागीय कार्रवाई कब होगी?
हत्या के प्रयास के आरोपी से गले मिलते कॉन्स्टेबल
दूसरा वीडियो और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। यह वीडियो पावर हाउस रेलवे स्टेशन के सामने का बताया जा रहा है। वीडियो में दुर्ग छावनी थाना में पदस्थ कॉन्स्टेबल प्रमोद साहू एक युवक से हाथ मिलाते और गले मिलते दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जिस युवक से कॉन्स्टेबल की इतनी आत्मीयता दिखाई दे रही है, उसके खिलाफ जामुल थाना में हत्या के प्रयास यानी धारा 307 के तहत मामला दर्ज है। इतना ही नहीं, वह पहले जेल भी जा चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर है।
अब जनता पूछ रही है कि आखिर एक गंभीर अपराध के आरोपी से पुलिसकर्मी का इतना करीबी व्यवहार क्यों? क्या यह सिर्फ पहचान थी या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है?
क्योंकि आम आदमी अगर थाने पहुंच जाए तो उससे घंटों पूछताछ होती है, लेकिन गंभीर धाराओं में आरोपी रहे लोगों के साथ अगर पुलिसकर्मी दोस्ताना अंदाज में दिखें, तो सवाल उठना लाजिमी है।
पुलिस की छवि पर लगातार लग रहे दाग
दुर्ग पुलिस पहले भी कई बार विवादों में आ चुकी है। कभी मारपीट के आरोप, कभी वसूली के आरोप और अब ये वायरल वीडियो। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि सोशल मीडिया के दौर में अब हर घटना कैमरे में कैद हो रही है। जनता सब देख रही है। ऐसे में विभाग के लिए केवल “जांच जारी है” कह देना काफी नहीं माना जा रहा।
छावनी सीएसपी प्रशांत कुमार पैकरा ने कहा है कि मामले की जांच चल रही है। लेकिन लोगों की मांग है कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सच्चाई सामने लाकर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई भी हो।
आखिर जनता किस पर भरोसा करे?
जब सड़क पर चालान के नाम पर नकद लेनदेन दिखे और गंभीर आरोपियों से पुलिसकर्मियों की दोस्ती नजर आए, तब सबसे बड़ा नुकसान जनता के भरोसे का होता है।
पुलिस का काम कानून का डर बनाए रखना है, लेकिन अगर वर्दी ही सवालों के घेरे में आ जाए तो आम लोगों के मन में व्यवस्था को लेकर अविश्वास बढ़ना तय है।
अब देखना होगा कि दुर्ग पुलिस इन दोनों मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई करती है या फिर ऐसा संदेश देती है कि वर्दी की गरिमा और कानून की साख अभी भी सबसे ऊपर है।
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