हाईवे पर अब पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट जरूरी, नियम तोड़ने पर शोरूम पर भी कार्रवाई

Helmet पहनना अनिवार्य

सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य परिवहन विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। अब हाईवे पर दोपहिया वाहन चलाते समय चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले सहयात्री के लिए भी “Helmet” पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में अपर परिवहन आयुक्त D. Ravishankar ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTO) को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए और इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जाए।

सहयात्री के लिए “Helmet” अनिवार्य, जागरूकता पर जोर

अब तक अधिकतर लोग केवल चालक के लिए हेलमेट को जरूरी मानते थे, लेकिन नए निर्देश के बाद यह साफ हो गया है कि पीछे बैठने वाला व्यक्ति भी उतना ही जिम्मेदार है। परिवहन विभाग ने RTO अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लोगों को “Helmet” पहनने के महत्व के बारे में जागरूक करें। स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर अभियान चलाकर लोगों को समझाया जाएगा कि हेलमेट न केवल नियम है, बल्कि जीवन बचाने का सबसे प्रभावी साधन भी है।

शोरूम पर भी कड़ी नजर, बिना “Helmet” डिलीवरी पर कार्रवाई

नए आदेश के तहत दोपहिया वाहन बेचने वाले शोरूम पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। यदि कोई शोरूम ग्राहक को बिना “Helmet” के वाहन की डिलीवरी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान Motor Vehicles Act के तहत लागू किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जब वाहन खरीदते समय ही हेलमेट को अनिवार्य कर दिया जाएगा, तो लोग शुरुआत से ही सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लेंगे।

हाईवे हादसों में “Helmet” की भूमिका बेहद अहम

परिवहन विभाग के अनुसार, हाईवे पर होने वाले सड़क हादसों में सिर की चोट सबसे बड़ी वजह बनती है। ऐसे में हेलमेटपहनना जीवन और मौत के बीच का अंतर साबित हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि हेलमेट पहनने वाले लोग गंभीर दुर्घटना के बावजूद सुरक्षित बच जाते हैं, जबकि बिना “Helmet” के हादसे जानलेवा साबित होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नया नियम लागू किया गया है।

डेटा की कमी, फिर भी चिंता बरकरार

हालांकि सड़क हादसों के कुल आंकड़े संबंधित विभागों के पास मौजूद हैं, लेकिन यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इनमें कितने लोग हेलमेट नहीं पहन रहे थे। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के पास इस तरह का अलग से डेटा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना हेलमेट के चलना जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।

Helmet पहनना अनिवार्य

शहरों में बदला ट्रेंड, कारों की ओर झुकाव

रायपुर जैसे शहरों में बिना हेलमेट चलने वालों पर सख्ती बढ़ने के बाद एक नया ट्रेंड देखने को मिला है। कई लोग, खासकर आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग, अब दोपहिया की जगह कार का उपयोग करने लगे हैं। इससे शहर की सड़कों पर चारपहिया वाहनों की संख्या बढ़ी है और ट्रैफिक दबाव में करीब 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है।

संकरी सड़कों पर बढ़ती चुनौती

राजधानी की ज्यादातर सड़कें Indore, Bhopal और Bhubaneswar जैसे शहरों की तुलना में संकरी हैं। ऐसे में ट्रैफिक का बढ़ता दबाव प्रशासन के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेलमेट नियम के साथ-साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी ध्यान देना जरूरी है।

नियम का उद्देश्य—जिंदगी बचाना

सरकार और परिवहन विभाग का मुख्य उद्देश्य हेलमेट के जरिए लोगों की जान बचाना है। नियम सख्त जरूर हैं, लेकिन इनका मकसद लोगों को सुरक्षित रखना है। यदि चालक और सहयात्री दोनों “Helmet” पहनने की आदत डाल लें, तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

read more : रायपुर में बड़ा हादसा: मल्टीलेयर फैक्ट्री में लगी भयंकर आग

 

Youthwings