Ministry Canteen Subsidy: मंत्रालय कैंटीन में अब नहीं मिलेगा सस्ता खाना! साय सरकार ने बंद की सब्सिडी, 25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म
Ministry Canteen Subsidy: छत्तीसगढ़ मंत्रालय की कैंटीन में सब्सिडी खत्म, हर महीने 18 लाख खर्च पर लगी रोक, अब निजी कंपनी संभालेगी संचालन
छत्तीसगढ़ मंत्रालय की कैंटीन में अब सस्ता खाना नहीं मिलेगा। साय सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए Ministry Canteen Subsidy बंद कर दी है। 25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म होने जा रही है। जानिए अब क्या बदलने वाला है।
Ministry Canteen Subsidy Stopped: मंत्रालय कैंटीन की सब्सिडी खत्म
Ministry Canteen Subsidy: छत्तीसगढ़ सरकार ने मंत्रालय की कैंटीन में दी जा रही सब्सिडी बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद अब मंत्रालय में कर्मचारियों और अधिकारियों को पहले की तरह सस्ता खाना नहीं मिल पाएगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले से हर साल करोड़ों रुपये की बचत होगी और वित्तीय बोझ कम किया जा सकेगा।
हर महीने खर्च होते थे 18 लाख रुपये
अब तक राज्य सरकार मंत्रालय स्थित कॉफी हाउस कैंटीन के संचालन के लिए हर महीने करीब 18 लाख रुपये की सब्सिडी देती थी। यह राशि कर्मचारियों और अधिकारियों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जाती थी।
सरकार के नए निर्णय के बाद इस मासिक खर्च पर रोक लग जाएगी, जिससे राज्य को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
Ministry Canteen Subsidy: 25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से पिछले करीब 25 वर्षों से मंत्रालय परिसर में कॉफी हाउस द्वारा कैंटीन का संचालन किया जा रहा था। इतने लंबे समय बाद पहली बार इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है।
यह फैसला प्रशासनिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
अब निजी कंपनी संभालेगी कैंटीन
सरकारी निर्णय के अनुसार मंत्रालय में संचालित मौजूदा कॉफी हाउस कैंटीन बंद की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह कैंटीन जल्द पूरी तरह बंद हो जाएगी।
इसके स्थान पर अब निजी कंपनी को कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो नई व्यवस्था के तहत भोजन और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
सरकार को उम्मीद है कि इससे सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
संसद की तर्ज पर लिया गया फैसला
Ministry Canteen Subsidy Stopped फैसला केंद्र सरकार के पुराने निर्णय की तर्ज पर लिया गया है। करीब पांच साल पहले संसद की कैंटीन में मिलने वाली फूड सब्सिडी भी खत्म कर दी गई थी।
उस समय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा था कि इससे हर साल करीब 17 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके बाद सांसदों ने भी सब्सिडी का लाभ नहीं लेने का निर्णय लिया था।
अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इसी मॉडल को अपनाया है।
क्या बदलेगा अब?
Ministry Canteen Subsidy होने के बाद मंत्रालय कर्मचारियों को भोजन के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि नई निजी कंपनी बेहतर गुणवत्ता, स्वच्छता और आधुनिक सेवाओं का दावा कर सकती है।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से कैंटीन संचालन अधिक पेशेवर तरीके से होगा।
कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
Ministry Canteen Subsidy खत्म होने से सबसे बड़ा असर मंत्रालय में रोजाना भोजन करने वाले कर्मचारियों पर पड़ेगा।
जहां पहले कम दर पर नाश्ता और खाना उपलब्ध होता था, अब बाजार दरों के करीब कीमतें तय हो सकती हैं। ऐसे में कर्मचारियों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
सरकार का वित्तीय फोकस
साय सरकार लगातार खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है। Ministry Canteen Subsidy बंद करने का फैसला भी उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य अनावश्यक खर्च कम कर जनहित और विकास योजनाओं पर ज्यादा फोकस करना है।
छत्तीसगढ़ Ministry Canteen Subsidy बंद होने से 25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म हो रही है। इससे सरकार को आर्थिक राहत मिलेगी, लेकिन कर्मचारियों के लिए सस्ता भोजन अब इतिहास बन सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि निजी कंपनी के आने के बाद सेवाओं में कितना बदलाव आता है।
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