Women Reservation Bill Voting: अमित शाह ने दिया 50% सीटें बढ़ाने ऑफर! फिर भी गिर गया महिला आरक्षण बिल
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश, 489 सांसदों में से 326 की जरूरत, सरकार ने दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटाया
Women Reservation Bill voting में सरकार को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में महिला आरक्षण सहित तीन बिलों को लेकर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन यह बिल पास नहीं हो पाया।
बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में कुल 489 सांसदों ने वोट डाले। बिलों को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 326 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार 28 वोटों से इस आंकड़े को नहीं छू पाई।
इस Women Reservation Bill voting के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर थी या नहीं।
489 सांसदों के बीच 298-230 का वोट डिवीजन
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर मतदान हुआ। यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाया गया था। मौजूदा सदन की प्रभावी संख्या 540 है, लेकिन मतदान के समय 489 सदस्य उपस्थित थे।
संवैधानिक संशोधन होने के कारण (Women Reservation Bill voting) इस विधेयक को पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी।
Lok Sabha women quota bill defeated होने के बाद सदन में हंगामा हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस ने इस एतिहासिक क्षण को गंवाया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि शेष दो बिल परिसीमन और संघ राज्य क्षेत्र विधेयक अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे।
‘देश की महिलाएं देख रही हैं रास्ते का रोड़ा कौन’ – अमित शाह
Women Reservation Bill voting : बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘मैं समझ रहा हूं कि कांग्रेस वोट नहीं देंगे तो बिल गिर जाएगा। मगर इस देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। जब चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।’
शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में एससी/एसटी सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।
‘50% संशोधन बिल लाने को तैयार’ – अमित शाह का बड़ा ऐलान
Women Reservation Bill voting : चर्चा के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट किया कि यदि सदन सहमत हो तो वे 50 प्रतिशत लोकसभा सीटें बढ़ाने से संबंधित संशोधन बिल लाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “अगर महिला आरक्षण को 2029 में लागू करना है तो परिसीमन आवश्यक है। देश को ‘उत्तर-दक्षिण’ के नरेटिव में नहीं बांटा जाना चाहिए।” शाह ने यहां तक कहा कि यदि आवश्यकता हो तो एक घंटे के लिए सदन की कार्यवाही रोककर भी इस पर संशोधन लाया जा सकता है।
उन्होंने साफ किया कि 50 प्रतिशत सीटों के विस्तार से दक्षिणी राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। वर्तमान में पांच दक्षिणी राज्यों के पास 129 सीटें हैं, जो 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद 195 हो जाएंगी।
कांग्रेस ने मांगा स्पष्टीकरण – के.सी. वेणुगोपाल ने उठाए सवाल
Women Reservation Bill voting : इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने रात 10 बजे नोटिफिकेशन जारी करके 2023 के महिला आरक्षण ( Reservation Bill ) कानून को लागू किया, जबकि संशोधन बिल पर चर्चा चल रही थी।
वेणुगोपाल ने इसे ‘संवैधानिक विसंगति’ करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार संसद को ‘रबर स्टैम्प’ की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सरकार से मौजूदा 543 सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की।
‘भरोसा नहीं, लिखकर दें तो भी नहीं मानेंगे’ – अखिलेश यादव
Women Reservation Bill voting : समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बहस में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों के अनुभव को देखते हुए उन्हें सरकार के आश्वासनों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है।
उन्होंने तंज करते हुए यह भी कहा कि ‘अगर भाजपा लिखकर दे देंगे कि हम महिला प्रधानमंत्री बनाएंगे तो भी मैं इन पर भरोसा नहीं करूंगा।’ यादव ने सरकार पर महिलाओं को ‘नारा’ बनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर एक ‘षड़यंत्र’ रच रही है।
Akhilesh Yadav ने साफ कहा कि सपा महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन और जातीय जनगणना के मुद्दों को अलग रखा जाना चाहिए।
बिल गिरने के बाद क्या? – दो अन्य बिल आगे नहीं बढ़ेंगे
संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक 2026 के हारने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया कि शेष दो विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही लोकसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है। यह पहली बार है जब पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार का कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक विफल हुआ है।
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