D.Ed Candidates Protest : 112वें दिन भी जारी अनशन, संविधान रैली को पुलिस ने रोका

D.Ed Candidates Protest

2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग पर चार महीने से भूखे पड़े युवा, सरकार की असंवेदनशीलता चरम पर

 

D.Ed Candidates Protest। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रही है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद 2300 सहायक शिक्षक पदों पर डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं की जा रही। इस अन्याय के खिलाफ डीएड अभ्यर्थी 24 दिसंबर 2025 से लगातार आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आज 14 अप्रैल 2026 को यह आंदोलन 112वें दिन में प्रवेश कर चुका है। चार महीने से ज्यादा समय से युवा भूखे-प्यासे धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की आंखें अभी भी बंद हैं।

 

डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर अभ्यर्थियों ने संविधान की प्रतियां हाथ में लेकर शांतिपूर्ण संविधान रैली निकाली। उद्देश्य था शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव कर न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराना और अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करना। लेकिन पुलिस प्रशासन ने धरना स्थल के गेट पर ही बैरिकेडिंग कर रैली रोक दी। अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया, न ही अपनी बात रखने का मौका दिया गया।

 

 न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना

 

D.Ed Candidates Protest : डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो बार और सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के 2300 रिक्त पदों पर डीएड योग्यता वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए। B.Ed अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने के बाद ये पद डीएड वालों के लिए आरक्षित हैं। फिर भी भाजपा सरकार ने कोर्ट आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

 

अभ्यर्थियों ने कई बार रैली, प्रदर्शन, ज्ञापन और दांडी मार्च के माध्यम से अपनी मांग शासन तक पहुंचाई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन मिले। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब युवा आमरण अनशन पर मजबूर हो गए हैं। कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से बीमार पड़ चुके हैं, फिर भी सरकार की चुप्पी बरकरार है।

 

 अंबेडकर जयंती पर तानाशाही का प्रदर्शन

 

D.Ed Candidates Protest : 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर अभ्यर्थियों ने संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए रैली निकाली। वे शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षा मंत्री के बंगले तक पहुंचना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने गेट पर ही उन्हें रोक दिया। यह घटना साफ दिखाती है कि भाजपा सरकार लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कितना कमजोर मानती है। जब युवा संविधान और न्यायालय के आदेशों की बात करते हैं, तो उन्हें रोका जाता है। क्या यह लोकतंत्र है या तानाशाही?

 

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार पूरी तरह असंवेदनशील और निरंकुश रवैया अपनाए हुए है। युवाओं के भविष्य की अनदेखी कर रही है। शिक्षा का अधिकार और रोजगार के अवसर देने के बजाय सरकार युवाओं को अनशन पर मजबूर कर रही है।

 

 सरकार की नाकामी

 

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पहले से ही बदहाल है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, फिर भी 2300 पद खाली पड़े हैं। डीएड अभ्यर्थी योग्य, प्रशिक्षित और कोर्ट द्वारा समर्थित हैं, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण वे बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

 

सरकार दावा करती है कि वह युवाओं का भविष्य संवार रही है, लेकिन हकीकत यह है कि हजारों डीएड युवा चार महीने से भूखे-प्यासे सड़क पर हैं। शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अभी तक इस मुद्दे पर कोई ठोस बयान नहीं दिया है। क्या सरकार को युवाओं की जान की कोई चिंता नहीं है?

 

पुलिस द्वारा रैली रोकना भी सरकार की असहिष्णुता को दर्शाता है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को बैरिकेड के पीछे रोकना दर्शाता है कि प्रशासन अभ्यर्थियों की आवाज दबाना चाहता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

 

 युवाओं की पीड़ा

 

D.Ed Candidates Protest : डीएड अभ्यर्थी सालों की मेहनत के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं। कई परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। अनशन के कारण स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, लेकिन सरकार की आंखें मूंदी हुई हैं। यदि कोई अभ्यर्थी गंभीर रूप से बीमार पड़ता है या जान गंवाता है, तो जिम्मेदार कौन होगा? साफ तौर पर भाजपा सरकार।

यह आंदोलन केवल 2300 पदों की नियुक्ति का नहीं है। यह न्याय, संवैधानिक मूल्यों और युवा शक्ति के सम्मान का प्रश्न है।

 सरकार से सवाल ( D.Ed Candidates Protest )

 

1. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा?

2. 2300 पदों पर 1:3 अनुपात में काउंसलिंग कर नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही?

3. चार महीने से आमरण अनशन पर बैठे युवाओं की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

4. पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण रैली रोकना लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या है?

5. शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री कब तक चुप्पी साधे रहेंगे?

 

डीएड अभ्यर्थियों का संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। अब सरकार को साबित करना होगा कि वह युवा हितैषी है या सिर्फ नारे लगाने वाली।

 

D.Ed Candidates Protest : छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार डीएड अभ्यर्थियों के साथ क्रूर अन्याय कर रही है। न्यायालय के आदेशों की अवहेलना, युवाओं की पीड़ा की अनदेखी और पुलिस के जरिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन दबाना यह सब सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करता है। समय आ गया है कि सरकार अपनी नींद से जागे, कोर्ट आदेश मानें और 2300 पदों पर तुरंत नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे। अन्यथा इतिहास इसे युवा विरोधी सरकार के रूप में याद रखेगा।

 

Read More : Raipur News: नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, 8 बड़े बकायादारों के व्यवसायिक परिसरों पर ताला

 

Youthwings