छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना को बचाने की नई पहल, जीपीएस टैग से होगी निगरानी
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण और वंशवृद्धि के लिए कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत अब मैना के पैरों में जीपीएस टैग लगाए जा रहे हैं, ताकि उसकी गतिविधियों पर लगातार नज़र रखी जा सके। हाल ही में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में दो गिद्धों को जीपीएस लगाकर छोड़ा गया था, उसी तर्ज पर अब पहाड़ी मैना पर भी ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
जीपीएस से ट्रैक होगी हर गतिविधि
टैगिंग के बाद मैना की हर गतिविधि को जीपीएस सिस्टम से ट्रैक किया जाएगा। एक विशेष टीम लगातार इन पक्षियों की निगरानी करेगी और दूर से उनकी दिनचर्या का अध्ययन करेगी — वे किस पेड़ पर बैठते हैं, कितनी देर तक रहते हैं, क्या खाते हैं, रात में कहां विश्राम करते हैं और सहवास की प्रक्रिया कैसे होती है, इन सभी पहलुओं पर रिसर्च किया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर जब मैना को प्रजनन केंद्र में लाया जाएगा, तो उसकी वंशवृद्धि और संरक्षण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
पहाड़ी मैना की पहचान में भी मिलेगी मदद
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक पहाड़ी मैना के नर और मादा की पहचान करना बेहद कठिन रहा है। जानकारी के अभाव में इनके प्रजनन और संरक्षण कार्यों में कई बाधाएं आईं। इसीलिए अब जीपीएस टैगिंग और व्यवस्थित अध्ययन के माध्यम से इनके व्यवहार और प्रजनन चक्र को समझने की कोशिश की जा रही है।
वर्तमान में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में लगभग 600 से अधिक पहाड़ी मैना निवास कर रही हैं।
विभाग का उद्देश्य – संरक्षण और वंशवृद्धि
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक नवीन कुमार ने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि पहाड़ी मैना की वंशवृद्धि और संवर्धन को गति दी जाए। इसीलिए जंगलों और पहाड़ों में विचरण करने वाली मैना के पैरों में जीपीएस टैग लगाए जाएंगे, जिनकी मॉनिटरिंग विभागीय अधिकारी स्वयं करेंगे। यह कदम न केवल पहाड़ी मैना की संख्या बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की इस राजकीय पक्षी को विलुप्त होने से बचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
