18वां ब्रिक्स संपन्न: PM मोदी ने दिया सस्टेनेबिलिटी का मंत्र, पुतिन-जिनपिंग से अहम रणनीतिक समझौते

नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 2026 रविवार को औपचारिक रूप से संपन्न हो गया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को वैश्विक चुनौतियों से निपटने वाला ‘समाधान का इकोसिस्टम’ बताया, जिससे पूरी दुनिया को बड़ी उम्मीदें हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को अग्रिम शुभकामनाएं दीं और सभी सदस्य देशों की टीमों के प्रति आभार जताया।

सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार प्रमुख स्तंभों पर जोर देते हुए स्पष्ट संदेश दिया। PM मोदी ने कहा कि हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति संपूर्ण मानवता के कल्याण के काम आए। ब्रिक्स में विकसित समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित न रहकर ‘ग्लोबल साउथ’ के हर देश तक पहुंचने चाहिए।

3 दिन में 15 द्विपक्षीय बैठकें: वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी दिल्ली

सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मैराथन कूटनीतिक संवाद किया। तीन दिनों के भीतर कुल 15 महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं:

चीन के साथ संबंधों को स्थिरता: राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति, द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को कम करने और सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए।

रूस के साथ रणनीतिक मजबूती: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी के बीच ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और औद्योगिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। नई दिल्ली घोषणापत्र में 15 क्षेत्रीय संघर्षों का उल्लेख रहा, लेकिन रूस के साथ संतुलित कूटनीति और समूह के भीतर सर्वसम्मति को प्राथमिकता दी गई।

मध्य पूर्व और कनेक्टिविटी: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से चाबहार बंदरगाह के विस्तार और समुद्री व्यापारिक सुरक्षा पर बात हुई। वहीं, यूएई के क्राउन प्रिंस के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति बनी।

बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार: पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र  महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, डब्ल्यूएचओ और डब्ल्यूटीओ  के प्रमुखों से मुलाकात कर वैश्विक संस्थाओं में समयानुकूल सुधारों की मांग उठाई। इसके अलावा मलेशिया, मिस्र, वियतनाम, दक्षिण अफ्रीका और इथियोपिया के साथ क्रिटिकल मिनरल्स व डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर साझेदारी मजबूत की गई।

सस्टेनेबिलिटी, एमएसएमई और आधुनिक तकनीक के बड़े फैसले

भारत की अध्यक्षता के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण संस्थागत निर्णयों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास और पर्यावरण सदियों से भारतीय संस्कृति में पूरक रहे हैं। सम्मेलन में घोषित प्रमुख कदम:

ब्रिक्स एमएसएमई कॉरपोरेशन पोर्टल: छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक ज्ञान, फंडिंग और नए बाजारों से जोड़ने की पहल।

ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब: सदस्य देशों के महानगरों के बीच शहरी परिवहन और बुनियादी ढांचे की श्रेष्ठ पद्धतियों को साझा करने का मंच।

डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: क्लीन एनर्जी सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड्स और ऊर्जा भंडारण तकनीकों को विश्वसनीय बनाने के लिए केंद्र की स्थापना।

एग्रो-इकोलॉजी सेंटर्स: पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़कर कम्युनिटी-बेस्ड क्लाइमेट एक्शन को बढ़ावा देना।

ग्लोबल साउथ के बढ़ते भरोसे को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स आज इसलिए सबसे मजबूत मंच है क्योंकि यहां छोटे-बड़े सभी देशों की आवाज सुनी जाती है और नीतियां केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर तय की जाती हैं।

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