Virendra Tomar Case: ग्वालियर से गिरफ्तारी, फिर रायपुर में जुलूस और अब कोर्ट से बरी; जानिए पूरा सच!

Virendra Tomar Case

Virendra Tomar Case: 12 साल पुराने रायपुर गोलीकांड में बड़ा फैसला, आरोपी बरी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वर्ष 2013 में हुए चर्चित गोलीकांड मामले में आखिरकार अदालत का फैसला सामने आ गया है। Virendra Tomar Case में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रुबी सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि Virendra Tomar Case में अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के साथ साबित करने में असफल रहा है, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया।

यह मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र के चौरसिया कॉलोनी का है, जहां 2013 में एक विवाद के दौरान गोली चलने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद अब Virendra Tomar Case में यह बड़ा फैसला आया है।

क्या था पूरा मामला?

Virendra Tomar Case की शुरुआत एक साधारण लेन-देन विवाद से हुई थी। फर्नीचर व्यवसायी मोहम्मद हबीब खान को वीरेंद्र सिंह ने अपनी बहन की शादी के लिए करीब 48 हजार रुपये का फर्नीचर तैयार करने का ऑर्डर दिया था। इसमें से 5 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे, जबकि 43 हजार रुपये बाकी थे।

फर्नीचर तैयार होने के बाद भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। 13 अगस्त 2013 को हबीब खान अपने साथियों के साथ फर्नीचर वापस लेने वीरेंद्र सिंह के घर पहुंचे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक रूप ले बैठा।

विवाद के दौरान चली गोली

अभियोजन के अनुसार, Virendra Tomar Case में आरोप था कि विवाद के दौरान वीरेंद्र सिंह ने पिस्टल से हबीब खान पर फायर किया। हालांकि गोली उन्हें नहीं लगी, बल्कि पीछे खड़े नौसाद आलम उर्फ असलम को जा लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

Virendra Tomar Case

जांच और साक्ष्यों की स्थिति

पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और आरोपी के पास से हथियार बरामद किया। इस हथियार को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद मामला अदालत में पेश किया गया। हालांकि, Virendra Tomar Case की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि गवाहों के बयान मजबूत नहीं थे और कई बिंदुओं पर विरोधाभास पाया गया।

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कोर्ट का फैसला क्या रहा?

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि Virendra Tomar Case में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। गवाहों के बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों में पर्याप्त मजबूती नहीं थी। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सभी धाराओं से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

बचाव पक्ष की दलील

Virendra Tomar Case में आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने बताया कि अदालत में पेश किए गए साक्ष्य टिक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सभी पहलुओं की जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा।

गिरफ्तारी और बाद का घटनाक्रम

Virendra Tomar Case से जुड़े आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर को 8 नवंबर 2025 को ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया था। उस पर सूदखोरी, जबरन वसूली और अवैध हथियार रखने जैसे अन्य मामलों में भी आरोप दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद रायपुर में उनका जुलूस निकाले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे विवाद और बढ़ गया था। इस घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।

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FAQ (Virendra Tomar Case)

Q1. Virendra Tomar Case क्या है?

Virendra Tomar Case रायपुर के 2013 के एक चर्चित गोलीकांड से जुड़ा मामला है, जिसमें विवाद के दौरान चली गोली से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

Q2. कोर्ट ने Virendra Tomar Case में क्या फैसला सुनाया?

कोर्ट ने Virendra Tomar Case में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपों को पुख्ता तरीके से साबित नहीं किया जा सका।

Q3. Virendra Tomar Case में गोलीकांड कैसे हुआ था?

यह घटना फर्नीचर के भुगतान को लेकर हुए विवाद के दौरान हुई थी, जहां कथित तौर पर फायरिंग हुई और एक व्यक्ति की मौत हो गई।

Q4. Virendra Tomar को कब गिरफ्तार किया गया था?

Virendra Tomar को 8 नवंबर 2025 को ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उन पर अन्य मामलों में भी आरोप दर्ज थे।

Q5. Virendra Tomar Case में आरोपी को बरी क्यों किया गया?

Virendra Tomar Case में गवाहों के बयान कमजोर पाए गए और पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके कारण कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

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