Vedanta Power Plant Accident पर सख्ती, केंद्रीय टीम करेगी जांच, 23 मजदूरों की मौत के बाद सियासत तेज
Vedanta Power Plant Accident में 23 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, केंद्र और राज्य दोनों की जांच, FIR पर उठे तीखे सवाल
छत्तीसगढ़ के सक्ती में Vedanta Power Plant Accident की जांच के लिए केंद्रीय टीम पहुंचेगी। 23 मजदूरों की मौत के बाद सियासत गरम, भूपेश बघेल ने FIR पर उठाए सवाल।
Vedanta Power Plant Accident पर बड़ा एक्शन, केंद्रीय टीम करेगी जांच
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए भीषण Vedanta Power Plant Accident ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक 23 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने भी जांच के लिए अपनी टीम भेजने का फैसला किया है।
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच दल में औद्योगिक सुरक्षा विभाग और बॉयलर निरीक्षक विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम जल्द ही दिल्ली से सक्ती पहुंचकर पूरे मामले की तकनीकी जांच करेगी और हादसे के कारणों का पता लगाएगी।
14 अप्रैल को हुआ था भीषण विस्फोट
यह दर्दनाक हादसा 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर यूनिट-1 में हुआ था। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, स्टीम पाइपलाइन से जुड़े पानी के सप्लाई पाइप के जोड़ में तकनीकी खराबी के चलते अचानक विस्फोट हो गया।
फॉरेंसिक जांच और मुख्य बॉयलर निरीक्षक की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि फर्नेस के अंदर अत्यधिक ईंधन जमा हो गया था, जिससे दबाव बढ़ा और पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसी के चलते जोरदार धमाका हुआ, जिसने कई मजदूरों की जान ले ली।
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राज्य सरकार ने भी दिए जांच के आदेश
Vedanta Power Plant Accident को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अलग से जांच के आदेश जारी किए हैं। इसके लिए बिलासपुर संभाग के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हादसे के हर पहलू की गहन जांच की जाए और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, सख्त कार्रवाई के निर्देश
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष और तेजी से पूरी की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
FIR पर सियासत तेज, भूपेश बघेल ने उठाए सवाल
इस बीच, इस पूरे मामले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने FIR को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पूछा कि आखिर “ऊपर वाला” कौन है, जिसके निर्देश पर FIR की कॉपी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। बघेल ने कहा कि जब पत्रकार FIR की कॉपी मांगते हैं, तो पुलिस “ऊपर से मना” होने की बात कहती है और उन्हें रायपुर में संपर्क करने को कहा जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 20 से ज्यादा मौतों से भी ज्यादा संवेदनशील FIR है? क्या इसके पीछे कोई डील चल रही है? उन्होंने सरकार से मांग की कि FIR को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

हादसे के बाद बढ़ी जवाबदेही की मांग
इस घटना के बाद मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन नहीं होने के कारण ऐसे हादसे होते हैं।
अब जब केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि दोषियों की पहचान होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजर केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह हादसा न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
