अमेरिका-ईरान में 24 घंटे में दूसरी बार भिड़ंत पनामा के तेल टैंकर पर हमले के बाद ट्रंप बोले- ‘ईरान का अस्तित्व खत्म हो सकता है’
अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर किए हमले, ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना, दो सप्ताह पुराना शांति समझौता लगभग ढहा
तेहरान/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह पुराना शांति समझौता अब लगभग ढह गया है। 24 घंटे के भीतर अमेरिका ने ईरान पर दूसरा बड़ा हमला किया है। यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एम/टी किकु’ पर ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान नहीं माना तो उसका अस्तित्व खत्म हो सकता है।
पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 4:30 बजे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एम/टी किकु’ पर एकतरफा ड्रोन हमला किया गया। यह टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दो मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल ले जा रहा था। अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिकी पलटवार: 10 सैन्य ठिकानों पर हमला
अमेरिकी नौसेना ने ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। CENTCOM के अनुसार, इन हमलों में ईरान की सैन्य निगरानी प्रणाली, संचार प्रणाली, वायु रक्षा साइटें, ड्रोन भंडारण केंद्र और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया। यह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित कई ठिकानों पर किया गया।
ईरान का जवाबी हमला
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसके जवाब में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। IRGC के अनुसार, इस हमले में कुवैत के अली अल-सलेम बेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को निशाना बनाया गया।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में किसी भी अमेरिकी सैनिक को हताहत होने या प्रमुख क्षति की कोई सूचना नहीं है। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने दुश्मन मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “बहुत संभव है कि तेहरान कभी सबक न सीखे।” उन्होंने चेतावनी दी, “हो सकता है कि जब हम अब वाजिब नहीं रह पाएंगे, तो हम उस काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर हो जाएंगे जो हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था। अगर ऐसा होता है, तो ईरान का इस्लामी गणराज्य अब अस्तित्व में नहीं रहेगा!”
क्यों बढ़ा तनाव?
यह ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान ने सिंगापुर-ध्वजांकित कार्गो जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर 25 जून को ड्रोन हमला किया। अमेरिका ने इसका पलटवार करते हुए ईरानी मिसाइल साइट्स और ड्रोन ठिकानों को नष्ट कर दिया। इसके बाद 27 जून को पनामा के टैंकर पर हुए हमले ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि जहाज अधिकृत मार्ग का उपयोग नहीं कर रहे थे। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और फरवरी 2026 में हुए हमलों के बाद इसे प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया था।
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