US Foreign Policy: भारत-चीन पर अमेरिका का दोहरा रवैया? अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने खोला राज

US Foreign Minister Rubio

US Foreign Minister Rubio

US Foreign Policy: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दुनिया के सबसे अहम नेताओं में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि पुतिन के पास दुनिया का सबसे बड़ा सामरिक परमाणु हथियारों का भंडार और दूसरा सबसे बड़ा रणनीतिक परमाणु हथियारों का जखीरा है। ऐसे में यूक्रेन संघर्ष का हल बिना पुतिन से बातचीत किए संभव ही नहीं है।

पुतिन के कद को नकारना मुश्किल – रुबियो

रुबियो ने अमेरिकी चैनल एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “पुतिन पहले से ही विश्व मंच पर एक अहम नेता हैं। जब लोग कहते हैं कि उनसे बातचीत करने से उनका कद बढ़ जाएगा, तो मुझे हैरानी होती है। पिछले कई सालों से मीडिया और दुनिया पुतिन की चर्चा करती रही है। यह साफ संकेत है कि पुतिन को नजरअंदाज कर शांति संभव नहीं है।”

चीन पर टैरिफ न लगाने की मजबूरी

रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ क्यों नहीं लगाया, जबकि भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया गया। उन्होंने कहा कि चीन रूस से जो तेल खरीद रहा है, उसका बड़ा हिस्सा रिफाइन करके फिर यूरोप और वैश्विक बाजार में बेचा जा रहा है। यदि चीन पर टैरिफ लगाया जाता तो ऊर्जा की वैश्विक कीमतें और ज्यादा बढ़ जातीं, जिससे संकट गहरा सकता था।

ट्रंप और पुतिन की मुलाकात

15 अगस्त को अलास्का के सैन्य अड्डे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई। यह बैठक करीब तीन घंटे चली, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बातचीत के बाद पुतिन ने कहा कि यूक्रेन युद्ध का हल इस वार्ता का मुख्य मुद्दा था और उन्होंने ट्रंप को मास्को आने का निमंत्रण भी दिया।

शांति की राह में अभी भी अड़चनें

हालांकि बातचीत में कुछ प्रगति हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। रुबियो ने कहा कि जब तक पुतिन और जेलेंस्की दोनों समझौते के लिए रियायतें नहीं देंगे, तब तक शांति संभव नहीं है। उन्होंने साफ किया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे को कुछ न कुछ देना ही होगा, तभी समाधान निकल सकता है।

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