Twisha Sharma Death Case में सास को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, रद्द हुई अग्रिम जमानत, अब जाना होगा जेल
Twisha Sharma Death Case: जबलपुर हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटा, जांच में सहयोग नहीं करने और मृतिका की छवि खराब करने के आरोपों को माना गंभीर
बहुचर्चित Twisha Sharma Death Case में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने जांच में सहयोग नहीं करने और मृतिका की छवि खराब करने के आरोपों को गंभीर माना। अब इस फैसले के बाद गिरिबाला सिंह को जेल जाना पड़ सकता है। आखिर सुनवाई के दौरान कोर्ट में क्या-क्या हुआ? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
Twisha Sharma Death Case: त्विषा डैथ केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सास गिरिबाला सिंह की बेल रद्द, अब जाना होगा जेल
बहुचर्चित त्विषा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास गिरिबाला सिंह को जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को पूरी तरह रद्द कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गिरिबाला सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उन्हें सीधे जेल जाना पड़ सकता है। इस मामले में हाई कोर्ट का फैसला देर रात सामने आया, जिसके बाद पूरे मामले को लेकर फिर से चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत देते हुए राहत प्रदान की थी, लेकिन इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद जबलपुर हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।
सुनवाई में सरकार ने रखे गंभीर आरोप
हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत के सामने कई गंभीर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह ने जमानत की शर्तों का लगातार उल्लंघन किया और जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी लगातार जांच से बचने की कोशिश कर रही थीं।
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह को जांच एजेंसी की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इतना ही नहीं, नोटिस तामील होने तक से बचने की कोशिश की गई। अदालत में यह भी कहा गया कि आरोपी का रवैया जांच में सहयोग करने वाला नहीं रहा और वह लगातार जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करती रहीं।
“जांच से बचने की कोशिश” पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने यह दलील भी दी कि जिला अदालत ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए जल्दबाजी में अग्रिम जमानत दे दी थी। उन्होंने कहा कि जमानत मिलने के बाद भी गिरिबाला सिंह ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी लगातार “लुका-छिपी का खेल” खेल रही थीं और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थीं। यही वजह रही कि राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
मृतिका की छवि खराब करने का भी आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान एक और अहम मुद्दा सामने आया। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मृतिका त्विषा शर्मा की छवि खराब करने की कोशिश की। अदालत में कहा गया कि यह कदम जमानत की शर्तों के खिलाफ था और इससे मामले की जांच भी प्रभावित हो सकती थी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी ने मीडिया के जरिए मृतिका को बदनाम करने का प्रयास किया, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया। इसी आधार पर यह दलील दी गई कि आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ जारी रखना उचित नहीं होगा।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी मुश्किलें
हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद अब गिरिबाला सिंह के सामने गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है। कोर्ट के फैसले के बाद अब उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। इस फैसले को त्विषा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
मामला पहले से ही काफी चर्चाओं में रहा है और अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर पूरे प्रदेश में इस केस को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की आगे की कार्रवाई में जुट गई हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
