ब्रेकफास्ट मीटिंग में खत्म हुआ सस्पेंस! सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को गले लगाकर किया इस्तीफे का ऐलान

सिद्धारमैया ने किया इस्तीफे का ऐलान

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से जारी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच अब बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई अहम बैठकों के बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पद छोड़ने की इच्छा जता दी है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राज्य में जल्द सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो और पहले से तय फॉर्मूले के तहत डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को मौका दिया जाए।

राहुल गांधी ने निभाई अहम भूमिका

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने दिल्ली में सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के साथ कई दौर की बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पार्टी में अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों का सम्मान करने पर जोर दिया। राहुल गांधी ने कथित तौर पर सिद्दारमैया को याद दिलाया कि 2023 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सत्ता को ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले के तहत चलाने पर सहमति बनी थी।

सिद्दारमैया ने मांगा था समय

जानकारी के अनुसार, सिद्दारमैया ने शुरुआत में कुछ समय की मांग की थी ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान जल्द नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में दिखाई दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि वादे के मुताबिक अब दूसरे नेता को जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है।

नेताओं के साथ हुई अहम बैठकें

बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी इस बदलाव के समर्थन में हैं। वहीं, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने भी सिद्दारमैया से बातचीत कर उन्हें पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने की सलाह दी। इसके बाद सिद्दारमैया ने अपने करीबी नेताओं और मंत्रियों के साथ चर्चा की।

सहयोगियों से बोले- अब और इंतजार नहीं

सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों ने उन्हें तुरंत फैसला लेने से बचने की सलाह दी, लेकिन सिद्दारमैया ने साफ कर दिया कि वह पार्टी नेतृत्व के निर्देश का सम्मान करेंगे। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा कि वह पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि राहुल गांधी के कहने पर वह किसी भी समय पद छोड़ सकते हैं।

कांग्रेस के लिए बड़ा संदेश

राजनीतिक जानकार इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस हाईकमान की मजबूत पकड़ के तौर पर देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दों पर पार्टी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में कर्नाटक में लिया गया यह फैसला कांग्रेस संगठन में केंद्रीय नेतृत्व की अहमियत और अनुशासन को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

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