ममता बनर्जी के लिए बढ़ी मुश्किलें, 100 पार्षदों के इस्तीफे से हिली TMC
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। राज्य में बीजेपी सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari लगातार प्रशासनिक बैठकों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उनकी एक अहम बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। इस घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
100 पार्षदों के इस्तीफे से पार्टी में बढ़ा दबाव
सूत्रों के अनुसार, राज्य की कई नगरपालिकाओं में TMC नेताओं के बीच नाराजगी चरम पर पहुंच चुकी है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि करीब 100 पार्षदों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इससे पार्टी संगठन के भीतर हलचल और तेज हो गई है। माना जा रहा है कि नगर निकाय चुनावों से पहले यह घटनाक्रम TMC के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे TMC सांसद और विधायक
उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों से जुड़े प्रशासनिक मामलों की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में टीएमसी सांसद Kakoli Ghosh Dastidar भी शामिल हुईं। हाल ही में उन्होंने पार्टी के जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उनके अलावा कई टीएमसी विधायक भी बैठक में नजर आए, जिनमें अणीसुर रहमान बिस्वास, बीना मंडल और मोहम्मद अब्दुल मतीन प्रमुख रहे।
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि उनका मकसद केवल अपने क्षेत्रों के विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी के भीतर संभावित टूट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ममता बनर्जी के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट
Mamata Banerjee की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी गठन के बाद पहली बार संगठन के भीतर इतनी बड़ी नाराजगी खुलकर सामने आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह असंतोष नहीं थमा, तो आने वाले समय में पार्टी को और बड़े झटके लग सकते हैं।
इसी बीच, कोलकाता के मेयर Firhad Hakim को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं कि उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार नेताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
