सुकमा के 50 गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा, नक्सल हिंसा से मुक्त गढ़ में गूंजा राष्ट्रगान; बदली बस्तर की तस्वीर

सुकमा

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 80वां स्वतंत्रता दिवस कई दूरदराज गांवों के लिए ऐतिहासिक बन गया। जिले के ऐसे करीब 50 गांवों में पहली बार ग्रामीणों ने अपने गांव में तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया, जहां लंबे समय तक नक्सल हिंसा का असर रहा था।

चिंतागुफा, चिंतलनार, जगरगुंडा, किस्टाराम और कोंटा समेत अलग-अलग थाना क्षेत्रों के गांवों में ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हुए। लोगों ने राष्ट्रगान गाया, राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और देशभक्ति के उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया।

जहां कभी नक्सलियों का डर था, वहां लहराया तिरंगा

सुकमा के इन गांवों में तिरंगा फहराए जाने को सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि क्षेत्र में हो रहे बदलाव की महत्वपूर्ण तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है। जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा के कारण सरकारी गतिविधियां और राष्ट्रीय पर्व आयोजित करना चुनौतीपूर्ण माना जाता था, वहां अब ग्रामीण खुले तौर पर स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के साथ इन क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ी है। इसके चलते ग्रामीणों का लोकतांत्रिक व्यवस्था और शासन-प्रशासन के प्रति भरोसा भी मजबूत होने की बात सामने आई है।

सुरक्षा बलों की मौजूदगी से बढ़ा ग्रामीणों का भरोसा

सुकमा में इस बदलाव के पीछे सुरक्षा व्यवस्था के साथ ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम करने के प्रयासों को भी अहम माना जा रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसका असर अब राष्ट्रीय पर्वों में ग्रामीणों की भागीदारी के रूप में भी दिखाई दे रहा है। कई गांवों में लोग खुद आगे आकर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों का हिस्सा बन रहे हैं।

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बच्चों की आवाज में गूंजा राष्ट्रगान

इन गांवों की तस्वीर इसलिए भी खास रही, क्योंकि जिन इलाकों में कभी बंदूक और हिंसा का डर था, वहीं अब बच्चों की आवाज में राष्ट्रगान सुनाई दिया। ग्रामीणों ने पूरे गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया और आजादी का पर्व मनाया। यह बदलाव सिर्फ सड़कों, स्कूलों और सरकारी भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के बीच बढ़ते भरोसे और मुख्यधारा से जुड़ाव को भी दर्शाता है।

SP मयंक गुर्जर बोले- यह नए सुकमा की शुरुआत

सुकमा के पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को जिले के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्ति के बाद यह स्वतंत्रता दिवस सुकमा के लिए ऐतिहासिक अवसर है।

उन्होंने बताया कि करीब 40 से 50 गांवों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम आयोजित होना अपने आप में बड़ा मील का पत्थर है। पुलिस का प्रयास है कि तिरंगा फहराने के साथ ग्रामीणों को शासन से जोड़ा जाए और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम किया जाए। SP के मुताबिक, ग्रामीण अब प्रशासन के साथ संवाद कर रहे हैं, अपनी समस्याएं साझा कर रहे हैं और राष्ट्रीय पर्वों में उत्साह के साथ भागीदारी कर रहे हैं।

सुकमा में बदल रही तस्वीर, भय की जगह विश्वास

सुकमा के इन गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाना बस्तर में बदलते माहौल की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है। जहां कभी नक्सली हिंसा का प्रभाव था, वहां अब लोकतांत्रिक व्यवस्था, प्रशासन और राष्ट्रीय पर्वों से जुड़ाव मजबूत होता दिखाई दे रहा है। इन 50 गांवों में लहराता तिरंगा आने वाले समय में शांति, विश्वास और विकास के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।

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