“आशावादी बने हुए हैं, किताब लिख रहे हैं” पत्नी ने बताया जेल में कैसे कट रहे वांगचुक के दिन 

प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में एकांत कारावास में तीन महीने से अधिक समय बिता चुके हैं, लेकिन उनकी पत्नी गीतांजली आंगमो ने बताया कि वे पूरी तरह आशावादी और सकारात्मक बने हुए हैं। जेल की कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका मनोबल नहीं टूटा है और वे अपने अनुभवों पर आधारित एक किताब लिख रहे हैं, जिसका संभावित शीर्षक ‘फॉरएवर पॉजिटिव’ होगा।

 

इंटरव्यू में गीतांजली आंगमो ने कहा, “सकारात्मक और आशावादी लोगों की एक अच्छी बात यह है कि वे हर चीज को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन जिस स्थिति में वह रह रहे हैं, वह बहुत ही दयनीय और कठिन है।” उन्होंने बताया कि वांगचुक जेल में फर्श पर कंबल बिछाकर सोते हैं, जहां कोई फर्नीचर नहीं है और टहलने-फिरने की जगह भी बहुत कम है। उनके पास फोन, टीवी या घड़ी जैसी कोई सुविधा नहीं है।

 

चींटियों से मिली प्रेरणा

आंगमो ने खुलासा किया कि वांगचुक को जेल में चींटियों में गहरी दिलचस्पी हो गई है। वे चींटियों के व्यवहार का अवलोकन करते हैं और उनकी एकजुटता व टीम स्पिरिट से प्रभावित हैं। उन्होंने पत्नी से चींटियों के व्यवहार पर किताबें मंगवाने को कहा है, क्योंकि “चींटी समुदाय में बहुत एकजुटता और टीम भावना होती है।”

 

परिवार और मीडिया पर प्रतिबंध

परिवार द्वारा लाए गए अखबारों में भी वांगचुक या लद्दाख से जुड़ी खबरें काट दी जाती हैं। आंगमो ने कहा, “जब वह अखबार में उन खबरों की कटिंग देखता है, तो उसे पता चल जाता है कि उस दिन उसकी तस्वीर जरूर छपी होगी या खबर लद्दाख के बारे में रही होगी।” इन प्रतिबंधों के बावजूद, वांगचुक ने अपना समय पढ़ने, ध्यान करने और व्यायाम में लगाया है।

 

 “वे कम में भी खुश रहते हैं”- आंगमो

आंगमो ने बताया कि वांगचुक की सेहत संतुष्ट है और वे मानसिक रूप से मजबूत हैं। “वे आम तौर पर बहुत आशावादी और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं, जो हर चीज में सकारात्मक पहलू देखते हैं। वे कम में भी खुश रहते हैं।” पहले दो महीनों तक दोनों ने अपनी समस्याओं के बारे में बात नहीं की और मजबूत दिखने का प्रयास किया।

 

गिरफ्तारी का कारण

वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 15 दिनों का उपवास खत्म करने के बाद लेह में हुई हिंसा (जिसमें चार लोगों की मौत हुई) के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। वे अब 110 दिनों से अधिक समय से जेल में हैं।

 

गीतांजली आंगमो ने जोर दिया कि वांगचुक ने जेल के जीवन को भी अपनी प्रगति का साधन बना लिया है और हर स्थिति का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। यह उनकी सकारात्मकता का जीता-जागता उदाहरण है।

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