SIR प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप: भाजपा ने 31 जनवरी तक समय सीमा बढ़ाने की मांग की

SIR प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

SIR प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

रायपुर : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने सोमवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की है। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, दावा-आपत्ति तथा फॉर्म-7 प्रस्तुत करने में आ रही बाधाओं का उल्लेख करते हुए मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तक बढ़ाने की मांग की है।

फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाने की शिकायत

डॉ. मिश्रा ने ज्ञापन में बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद आयोग के आदेश दिनांक 24 जून 2025 एवं समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार भाजपा द्वारा नियुक्त बीएलए (BLA) और मतदाताओं द्वारा फॉर्म-7 प्रस्तुत किए जा रहे हैं। लेकिन कई स्थानों से यह शिकायत मिल रही है कि नियुक्त ERO और BLO या तो फॉर्म-7 लेने से इंकार कर रहे हैं या बिना ठोस कारण के उन्हें निरस्त कर रहे हैं।

दावा-आपत्ति केंद्रों में BLO की अनुपस्थिति

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अनेक दावा-आपत्ति केंद्रों में नियुक्त BLO न तो उपस्थित रहते हैं और न ही घर-घर जाकर दावा-आपत्ति का सत्यापन कर रहे हैं। कई केंद्रों में फॉर्म-7 उपलब्ध ही नहीं है, जिसके कारण मतदाता अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं जुड़ पा रहे हैं, जबकि अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए नहीं जा रहे हैं।

शिकायतों पर नहीं हो रही कार्रवाई

डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि जब इस विषय में ERO अथवा जिला निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत की जाती है, तो उस पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। फॉर्म-7 को निराधार रूप से अस्वीकार करना संविधान और SIR प्रक्रिया में निहित मतदाता अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि इस विषय में 12 जनवरी 2026 को भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी अभ्यावेदन सौंपा गया था।

संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप

ज्ञापन में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के तहत दायित्वों की अवहेलना कर कुछ ERO और BLO लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आने वाला कृत्य कर रहे हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से राजनीतिक दलों और मतदाताओं को उनके विधिक एवं संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिससे मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण का उद्देश्य विफल हो रहा है। इसी कारण दावा-आपत्ति की समय सीमा 31 जनवरी 2026 तक बढ़ाना आवश्यक बताया गया है।

 

 

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