“मैं बंगबंधु की बेटी हूं…” कहते हुए रो पड़ी शेख हसीना, दो साल बाद पहली बार बोली- ‘वो छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था’
भारत से वर्चुअल संबोधन में शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की, लेकिन…
Sheikh Hasina Speech: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत से वर्चुअल माध्यम के जरिए एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया। नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से हुए इस लाइव वर्चुअल संबोधन की शुरुआत में ही शेख हसीना भावुक हो गईं और अपने परिवार के सदस्यों को याद करते हुए रो पड़ीं। खुद को संभालते हुए उन्होंने कहा कि आज वह केवल बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में बात कर रही हैं।
शेख हसीना ने अपने संबोधन में बांग्लादेश में जुलाई और अगस्त 2024 के दौरान हुए आंदोलन और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था और उनकी सरकार ने शुरुआत से ही बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की थी।
परिवार को याद कर भावुक हुईं शेख हसीना
अपने भाषण की शुरुआत करते हुए शेख हसीना अपने परिवार के सदस्यों को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वह आज पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में भी बात कर रही हैं।
शेख हसीना के परिवार के कई सदस्यों की 1975 में ढाका में हत्या कर दी गई थी। परिवार का जिक्र करते हुए वह अपने आंसुओं को नहीं रोक सकीं और कुछ देर के लिए भावुक हो गईं।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से उन्होंने अपने प्यारे बांग्लादेश को कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए देखा है। उनके मुताबिक, मौजूदा बांग्लादेश वह देश नहीं है जिसे उन्होंने बनाने की कोशिश की थी और न ही वह बांग्लादेश है जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने अपनी जान कुर्बान की थी।
जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन पर क्या बोलीं शेख हसीना?
शेख हसीना ने अपने संबोधन में जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं को लेकर कहा कि वह इस पूरे मामले की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हैं। उन्होंने दावा किया कि यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था।
पूर्व प्रधानमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने आंदोलन के दौरान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने धैर्य के साथ इस मुद्दे को संभालने की कोशिश की।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि सुधार की मांग की आड़ में कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने का प्रयास किया।
दो साल पहले छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश
बांग्लादेश में 2024 में शुरू हुआ छात्र आंदोलन कुछ ही समय में बड़े राजनीतिक विरोध में बदल गया था। शुरुआत में प्रदर्शन आरक्षण व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में तब्दील हो गया।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति लगातार बिगड़ती गई और हिंसा के बीच शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से बाहर जाना पड़ा था। इसके बाद वह भारत में रह रही हैं।
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और सत्ता परिवर्तन हुआ। इसके बाद से बांग्लादेश और शेख हसीना के भविष्य को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चा होती रही है।
आंदोलन से सरकार विरोध तक कैसे पहुंचा मामला?
बांग्लादेश में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था। शुरुआत में आंदोलन का केंद्र आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग थी।
हालांकि समय के साथ प्रदर्शन का दायरा बढ़ता गया और सरकार के खिलाफ विरोध तेज हो गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।
जैसे-जैसे विरोध बढ़ा, कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं। आखिरकार 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और देश छोड़ दिया।
भारत में निर्वासन में रह रही हैं शेख हसीना
बांग्लादेश छोड़ने के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं। करीब दो वर्षों से वह सार्वजनिक तौर पर अपनी राजनीतिक स्थिति और बांग्लादेश की परिस्थितियों पर समय-समय पर प्रतिक्रिया देती रही हैं।
अब फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से उनके वर्चुअल संबोधन ने एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति और 2024 के घटनाक्रम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
शेख हसीना पर कानूनी कार्रवाई का भी मुद्दा
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। उनके खिलाफ हत्या, भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है।
बांग्लादेश में उनके खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा होती रही है। वहीं शेख हसीना अपने खिलाफ लगे कई आरोपों और 2024 के घटनाक्रम को लेकर अपनी ओर से अलग पक्ष रखती रही हैं।
क्या इस साल बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना?
शेख हसीना की संभावित बांग्लादेश वापसी को लेकर भी समय-समय पर अटकलें सामने आती रही हैं। हालांकि उनकी वापसी को लेकर स्थिति कई कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
वर्तमान में उनका वर्चुअल संबोधन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2024 में सत्ता परिवर्तन और देश छोड़ने के बाद यह उनके प्रमुख सार्वजनिक संबोधनों में से एक है।
शेख हसीना ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने देश को मुश्किल परिस्थितियों से गुजरते हुए देखा है।
उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि जिस बांग्लादेश के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया था, वह आज उनके सामने दिखाई देने वाला बांग्लादेश नहीं है।
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