Anti-Naxal Operation: हिड़मा के ढेर होने के बाद अब पुलिस के निशाने पर शीर्ष नक्सली कमांडर, बड़े ऑपरेशन की तैयारी तेज
Naxal Encounter
Anti-Naxal Operation: छत्तीसगढ़ के कुख्यात और मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर मांडवी हिड़मा की मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की रणनीति को और तेज कर दिया है। आंध्र प्रदेश में हुए एक छोटे लेकिन सटीक ऑपरेशन में हिड़मा, उसकी पत्नी और चार अन्य नक्सली मार गिराए गए। इस घटना को माओवादी संगठन के लिए सबसे बड़ी चोट माना जा रहा है।
पुलिस के निशाने पर अब एक दर्जन टॉप नक्सली
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब करीब एक दर्जन बड़े नक्सली कमांडरों को टारगेट में लेकर घेराबंदी की रणनीति पर काम कर रही है। इनमें— देवजी, गणपति, मिसिर बेसरा, संग्राम, रामदेर, पापाराव, गणेश उइके, बरसे, देवा, एरॉ, केसा जैसे नाम शामिल हैं। इनके साथ करीब 250 से अधिक सशस्त्र कैडर भी सक्रिय हैं, जिन्हें पुलिस ट्रैक कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिड़मा के मारे जाने से माओवादी संगठन का स्थानीय कैडर बुरी तरह टूट गया है और संगठन में नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है।
सात दिन में 9 से अधिक नक्सली ढेर
दक्षिण बस्तर में बीते एक सप्ताह में किए गए लगातार ऑपरेशनों में पुलिस ने 9 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है। इसके चलते अब नक्सलियों के पास या तो आत्मसमर्पण करने या भागने का विकल्प ही बचा है।
तेलंगाना वार्ता प्रस्ताव पर नक्सलियों की नजर
तेलंगाना में जारी शांति वार्ता और युद्धविराम की घोषणा की वजह से वहाँ नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन धीमा है। इसी कारण दक्षिण बस्तर और आसपास के क्षेत्र के कई नक्सली तेलंगाना में शरण लेने की कोशिश में हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले आत्मसमर्पण करने की फिर अपील की है।
पूर्व DG आरके विज का बयान
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी और नक्सली मामलों के विशेषज्ञ आरके विज ने हिड़मा की मौत को नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी सफलता बताया। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि— “मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, यह कहना जल्दबाजी होगी।”
आत्मसमर्पित नक्सली बद्रना का भावुक बयान
हिड़मा को नक्सल संगठन में शामिल कराने वाले आत्मसमर्पित नक्सली बद्रना ने उसकी मौत पर दुख जताया।उसने कहा— “हिड़मा ने मुझे देखकर नक्सल संगठन ज्वाइन किया था, लेकिन आज उसकी मौत बहुत दर्दनाक है।”
