रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा की मौत पर भारी बवाल: हॉस्पिटल के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में धक्का-मुक्की

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रसूता कल्पना मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को न्याय की मांग को लेकर मृतका के परिजनों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने निजी अस्पतालों की मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर तालाबंदी की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया।

डॉ. प्रियंक शर्मा के सिटी हॉस्पिटल के बाहर तीखा टकराव

प्रदर्शनकारी संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के नवनियुक्त अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा के निजी अस्पताल ‘सिटी हॉस्पिटल’ के बाहर पहुंचे और जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए। सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अस्पताल परिसर के मुख्य गेट पर प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। घटना से जुड़े सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रमोद शर्मा को जबरन पकड़कर गाड़ी में बैठाते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान विरोध दर्ज करा रहीं कुछ महिलाओं सहित कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस द्वारा मौके से हिरासत में लिया गया।

सीएसपी बोले-बिना अनुमति घेराव, धारा 151 के तहत कार्रवाई

मामले पर जानकारी देते हुए सीएसपी (CSP) राजीव पाठक ने बताया कि बिना किसी पूर्व सूचना अथवा प्रशासनिक अनुमति के बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पताल के सामने एकत्रित होकर हंगामा कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों द्वारा समझाइश देने के बाद भी जब भीड़ नियंत्रित नहीं हुई और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी, तब एहतियातन कुछ लोगों को मौके से हिरासत में लिया गया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 151 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप: न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे केवल प्रसूता कल्पना मिश्रा की असामयिक मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और मुख्य जिम्मेदार डॉक्टरों व प्रबंधकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिजनों का आरोप है कि पूरे प्रकरण में निजी अस्पतालों की संदिग्ध भूमिका रही है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी अस्पतालों पर तत्काल तालाबंदी की जानी चाहिए।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। पुलिस द्वारा आधिकारिक तौर पर कुल कितने लोगों को हिरासत में रखा गया है और आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इस पर अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए अस्पताल और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात है।

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