पीओके में खूनी संघर्ष! पाक सेना के दमन में 27 की मौत, 100 से ज्यादा घायल, JAAC के खिलाफ आतंकी निशाना

POK protest Pakistan army firing

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बिजली, आटा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भड़के आंदोलन के दौरान पाक सेना की अंधाधुंध गोलीबारी, JAAC पर आतंकी संगठन का लेबल

 

रावलकोट, पीओके। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने खूनी खेल खेला है। हक मांग रहे कश्मीरियों को पाकिस्तानी सेना ने गोलियों से भून दिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प और गोलीबारी में 27 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। यह खूनी वारदात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के शहर रावलकोट में हुई।

 

गोलीबारी रविवार 7 जून को तब शुरू हुई, जब एक प्रदर्शनकारी कारोबारी शाहजेब हबीब की पुलिस फायरिंग में मौत के बाद लोग अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

 

बवाल की शुरुआत कैसे हुई?

बवाल शुक्रवार की रात शुरू तब हुआ जब रावलकोट में पुलिस फायरिंग में प्रदर्शनकारी कारोबारी शाहजेब हबीब की मौत हो गई। उसका शव रावलकोट के मिलिट्री हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया, लेकिन रविवार तक पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया। इससे नाराज लोग अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।

 

इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए जुटी भीड़ पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के इस दमन में 27 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

 

JAAC पर आतंकी संगठन का लेबल

यह आंदोलन स्थानीय संगठन ‘जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC)’ के नेतृत्व में चल रहा है। JAAC कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि इसमें व्यापारी, वकील, छात्र और आम नागरिक शामिल हैं। JAAC पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बदहाली के लिए वहां की सेना को जिम्मेदार ठहराता है।

 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए JAAC को ‘आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया है। इसके बाद पीओके पुलिस ने JAAC के मुख्यालय को सील कर दिया है।

 

प्रदर्शनकारियों की 38 मांगें

JAAC ने पाकिस्तान सरकार के सामने 38-सूत्रीय मांगों का चार्टर सौंपा है। आंदोलन की मुख्य वजहें ये हैं:

 

बिजली की लूट: पीओके की नदियों पर बने बिजली प्रोजेक्ट्स से पूरा पाकिस्तान तो रोशन होता है, लेकिन पीओके के लोगों को भारी टैक्स लगाकर महंगी बिजली बेची जाती है।

रोटी का संकट: आटे और गेहूं की कीमतें आसमान छू रही हैं, लोग मांग कर रहे हैं कि उन्हें आटे पर सब्सिडी दी जाए।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व: पीओके विधानसभा की 45 सीटों में से 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो पाकिस्तान के शहरों में रहते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान हर बार अपनी पसंद की ‘कठपुतली सरकार’ चुनता है।

वीआईपी कल्चर का अंत: आम जनता के लिए महंगाई और अकाल के बीच पाकिस्तानी हुक्मरान और अफसर लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं।

 

 

POK protest Pakistan army firing

पाकिस्तानी सेना का दमन और बंद

घटना के बाद से पूरे पीओके में तनाव चरम पर है। 5 जून से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। प्रदर्शन से निपटने के लिए पाकिस्तान सरकार 14,000 सैनिकों की फौज भेज रही है।

 

प्रदर्शनकारियों ने शाहजेब हबीब के शव को दफनाने से इनकार कर दिया है। परिजनों का कहना है कि जब तक सरकार JAAC पर लगे प्रतिबंध को नहीं हटाती और उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक शव दफनाया नहीं जाएगा और न ही धरना प्रदर्शन बंद होगा।

 

मानवाधिकार संगठन चिंतित

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने रावलकोट में हुई हिंसा और JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध पर चिंता जताई है। आयोग ने सवाल उठाया है कि एक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना कितना सही है।

 

जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कोर कमेटी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपील करते हुए कहा कि “शांतिपूर्ण जन आंदोलन को राज्य के दमन, मानवाधिकार उल्लंघन, नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध और निहत्थे नागरिकों की हत्या का सामना करना पड़ रहा है”।

 

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