सरकारी विमान में संत की सवारी! संवैधानिक पद नहीं फिर भी धीरेंद्र शास्त्री छत्तीसगढ़ शासन के विमान में क्यों ? उठते तीखे सवाल…
सरकारी विमान में संत की सवारी
रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन लिखे सरकारी विमान से रायपुर एयरपोर्ट पर उतरे दृश्य ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विमान के पीछे छत्तीसगढ़ सरकार का आधिकारिक लोगो लगा था और सबसे पहले उससे उतरे सूबे के नए कौशल एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब। उनके पीछे नजर आए भगवा वस्त्रों में एक संत—पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिनका गहरा नाता मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम से है।
इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। खाकी वर्दी में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने श्रद्धा भाव से अपने जूते उतारकर शास्त्रीजी के पैर छू लिए। यही से विवाद ने जोर पकड़ लिया।
श्रद्धा निजी, लेकिन सरकारी मर्यादा का क्या?
धार्मिक आस्था हर व्यक्ति का निजी विषय हो सकती है, लेकिन सवाल तब खड़े होते हैं जब सरकारी वर्दी और सरकारी संसाधन आस्था के साथ जुड़ जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—क्या पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री किसी संवैधानिक पद पर हैं?
क्या वे मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यपाल या किसी सरकारी हैसियत में हैं, जिसके तहत उन्हें सरकारी विमान में यात्रा की अनुमति दी जा सके?
अगर नहीं, तो फिर सरकारी विमान में उन्हें लाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया?
मंत्री कार्यालय की सफाई, लेकिन उलझन बरकरार
जब इस मुद्दे पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनके कार्यालय की ओर से सफाई दी गई कि सरकारी विमान धीरेंद्र शास्त्री को लेने नहीं गया था। बताया गया कि मंत्री मध्य प्रदेश के सतना में किसी कार्यक्रम में शामिल होने गए थे और वापसी के दौरान शास्त्रीजी ने अनुरोध किया कि यदि विमान खाली हो तो उन्हें भी रायपुर ले जाया जाए। मंत्री ने उन्हें साथ ले लिया। लेकिन यह सफाई नए सवाल खड़े करती है।
दौरा कार्यक्रम ने बढ़ाई शंका
मंत्री का जारी आधिकारिक दौरा कार्यक्रम बताता है कि वे सुबह 10 बजे सतना से रवाना हुए और 11 बजे रायपुर पहुंच गए।
अब सवाल यह है कि—सतना में ऐसा कौन-सा महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम था जो महज एक घंटे में समाप्त हो गया?
क्या यह दौरा केवल औपचारिकता था?
और क्या यह महज संयोग है कि इसी दौरान भिलाई में पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा 25 दिसंबर से शुरू होने वाली थी?
कथा आयोजन और यात्रा का मेल
जिस समय यह यात्रा हुई, उसी दौरान भिलाई में सेवा समर्पण समिति द्वारा आयोजित हनुमंत कथा की तैयारियां चल रही थीं। ऐसे में सरकारी विमान, संत की यात्रा और धार्मिक आयोजन का समय एक-दूसरे से मेल खाता दिख रहा है, जिसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
कार्रवाई सिर्फ टीआई पर, असली सवाल बाकी
शास्त्रीजी के पैर छूने वाले टीआई को लाइन अटैच जरूर कर दिया गया है, लेकिन यह कार्रवाई सवालों का जवाब नहीं देती। मुख्य प्रश्न अब भी कायम है—सरकारी विमान का इस्तेमाल आखिर किस नियम और किस अधिकार के तहत किया गया?
गॉड ऑफ ऑनर बंद, फिर यह क्या था?
हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने आदेश जारी किया था कि अब मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को गॉड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भी कथावाचक को गॉड ऑफ ऑनर देने पर भारी विवाद हुआ था। लेकिन छत्तीसगढ़ में तो मामला इससे आगे निकल गया— यहां गॉड ऑफ ऑनर नहीं, बल्कि वर्दी में झुककर पैर छूने का दृश्य सामने आया।
जवाब का इंतजार
फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। टीआई पर कार्रवाई हो गई, लेकिन सरकारी विमान के इस्तेमाल को लेकर सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट और पारदर्शी जवाब नहीं आया है।
जनता यही जानना चाहती है— यह श्रद्धा थी या सत्ता और सरकारी सुविधाओं की मर्यादा का उल्लंघन?
