सरकारी स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री बैन? DEO के आदेश से मचा विवाद
सिंगरौली के जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने शासकीय स्कूलों में बिना अनुमति पत्रकारों और सामान्य नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। प्राचार्यों की शिकायत के बाद जारी हुए इस आदेश में छात्र सुरक्षा और शासकीय कार्यों में बाधा का हवाला दिया गया है। आदेश के कड़ाई से पालन के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्यों की शिकायत के बाद जारी हुआ आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने आदेश जारी कर सभी शासकीय स्कूलों में बिना सक्षम अनुमति पत्रकारों और सामान्य लोगों के निरीक्षण पर रोक लगा दी है। प्राचार्यों का कहना था कि अनधिकृत लोग स्कूलों में पहुंचकर अनावश्यक निरीक्षण कर रहे हैं और शासकीय कार्यों में व्यवधान पैदा कर रहे हैं, जिसे शासकीय नियमों के विपरीत बताया गया है।
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का दिया गया हवाला
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी बाहरी व्यक्ति और पत्रकार को बिना अनुमति के स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह निर्देश जिले के सभी शासकीय स्कूलों पर लागू रहेगा।

क्या DEO पर पहले भी हैं आरोप?
गौरतलब है कि सिंगरौली का शिक्षा विभाग इससे पहले भी विवादों में रहा है। अप्रैल 2026 में लोकायुक्त रीवा ने शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप में जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई अधिकारियों पर FIR दर्ज की थी। जांच में 19 स्कूलों के लिए 4.68 करोड़, 61 स्कूलों में बिजली के सामान पर 3.05 करोड़ और 558 स्कूलों के लिए साफ-सफाई के सामान पर 98 लाख रुपये के भुगतान में गड़बड़ी पाई गई थी।
हालांकि, लोकायुक्त FIR के बावजूद पूर्व प्रभारी DEO एस. बी. सिंह को शहडोल संभाग में सहायक संचालक का प्रभार सौंपा गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं। कानूनी दृष्टि से FIR दर्ज होना किसी को दोषी नहीं बनाता, लेकिन इस फैसले ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल, DEO कविता त्रिपाठी का यह नया आदेश पत्रकारों और आम नागरिकों की पहुंच को लेकर विवाद का केंद्र बना हुआ है।
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