MP में स्कूल मर्जर पर संग्राम: सड़क पर उतरी ‘Gen Alpha’ और ‘Gen Z’, कांग्रेस-BJP में छिड़ी जुबानी जंग

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का नीलम पार्क उस वक्त एक बड़े आंदोलन का गवाह बना, जब प्रदेश भर से आए ‘जेन अल्फा’ और ‘जेन जी’ छात्र अपने अभिभावकों और शिक्षकों के साथ धरने पर बैठ गए। यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के ‘मर्जर’ किए जाने के फैसले के खिलाफ था। जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उनमें सरकार के खिलाफ बैनर और पोस्टर नजर आए। इस छात्र आंदोलन ने प्रदेश में एक नई सियासी बहस को जन्म दे दिया है।

क्या हैं छात्रों और अभिभावकों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन में शामिल छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने अपनी कई व्यवहारिक परेशानियां और मांगें रखीं।

दरअसल गांव के छोटे स्कूलों को बंद करके उन्हें दूर स्थित ‘सांदीपनि’ या ‘सीएम राइज’ स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। बच्चों का कहना है कि नए स्कूल उनके गांवों से 10 से 15 किलोमीटर दूर हैं।

सरकार ने बस सुविधा देने का वादा तो किया है लेकिन जमीनी स्तर पर बसों के संचालन में भारी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

स्कूलों को मर्ज करने का फैसला वापस लेने के साथ-साथ शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों पर तत्काल भर्ती करने और TET की अनिवार्यता को खत्म करने की भी मांग प्रमुखता से उठाई गई।

सिर्फ भोपाल नहीं, अन्य जिलों की ‘जेन अल्फा’ भी परेशान

यह समस्या केवल राजधानी के आसपास की नहीं है। मध्य प्रदेश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी बहुल जिलों जैसे- धार, झाबुआ, बैतूल, सीहोर, विदिशा और शहडोल में भी इसी तरह का असंतोष पनप रहा है।

तकनीक के युग में पैदा हुई ‘जेन अल्फा’ (Gen Alpha) आधुनिक शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम तो चाहती है लेकिन ग्रामीण भौगोलिक परिस्थितियों के कारण 15 किलोमीटर का सफर उनके लिए शारीरिक और मानसिक थकावट का कारण बन रहा है। अन्य जिलों से आ रही रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि बारिश के दिनों में खराब रास्तों के कारण बसें गांवों तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे इन हाइटेक स्कूलों में भी बच्चों की उपस्थिति गिर रही है।

आंदोलन पर गरमाई सियासत: कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

छात्रों के इस बड़े जमावड़े ने राजनीतिक गलियारों का तापमान भी बढ़ा दिया है।

कांग्रेस का हमला: “यह देश और प्रदेश का दुर्भाग्य”

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य और वरिष्ठ नेता कमलेश्वर पटेल ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिन बच्चों के हाथों में पढ़ने के लिए कॉपी-किताब होनी चाहिए, आज उनमें आंदोलन के बैनर-पोस्टर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह मध्य प्रदेश का दुर्भाग्य है। कांग्रेस सरकार ने शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए हर जिले, ब्लॉक, गांव और मजरे-टोले में स्कूल खोलने का काम किया था। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इन स्कूलों को खत्म कर रही है। आज न शालाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं। यह भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

भाजपा का पलटवार: ‘हम गांव तक दे रहे हैं आधुनिक शिक्षा’

कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी ने कहा कि कांग्रेस के समय की नीतियां आज के समय में प्रासंगिक नहीं हैं।

उनका कहना है कि कांग्रेस के समय मजरे-टोलों में स्कूल इसलिए खोले जाते थे क्योंकि उस वक्त गांवों में सड़कें ही नहीं थीं। आज भाजपा सरकार ने गांव-गांव तक सड़कों का जाल बिछा दिया है और परिवहन सुविधाएं काफी बेहतर हो चुकी हैं। हमारी सरकार बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने के लिए ‘सीएम राइज’ और ‘सांदीपनि’ जैसे आधुनिक स्कूल खोल रही है। बच्चों को घर से स्कूल तक लाने-ले जाने के लिए बस सुविधा दी जा रही है। हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं।

MP में स्कूल मर्जर पर संग्राम!

सरकार का विजन छोटे स्कूलों को मिलाकर एक बड़ा, सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक स्कूल बनाने का है, जो गुणवत्ता के लिहाज से एक शानदार कदम है। लेकिन, जमीनी स्तर पर ट्रांसपोर्टेशन और दूरी की जो व्यावहारिक समस्याएं आ रही हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकार बच्चों के सुरक्षित परिवहन का पुख्ता और स्थायी मॉडल लागू कर दे, तो ‘जेन अल्फा’ के लिए यह नई शिक्षा क्रांति मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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