Mokama Dularchand Murder C में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, पटना ग्रामीण एसपी समेत 4 अफसरों का ट्रांसफर, बाढ़ के SDPO सस्पेंड

Mokama Dularchand Murder Case: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने पटना के ग्रामीण एसपी समेत चार अफसरों का तबादला कर दिया है, जबकि बाढ़ के एसडीपीओ को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है।

चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई

मोकामा के घोसवरी में प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की और बिहार डीजीपी विनय कुमार से कल दोपहर 12 बजे तक एक्शन टेकेन रिपोर्ट (ATR) मांगी है।

चार अधिकारियों का तबादला, एक निलंबित

आयोग के आदेश के अनुसार, बाढ़ के एसडीओ सह मोकामा विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर चंदन कुमार (बिहार प्रशासनिक सेवा) को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह आईएएस अधिकारी आशीष कुमार को नियुक्त किया गया है, जो वर्तमान में पटना नगर निगम के अतिरिक्त नगर आयुक्त हैं।

इसके अलावा, एसडीपीओ बाढ़-1 राकेश कुमार और एसडीपीओ बाढ़-2 अभिषेक सिंह का भी ट्रांसफर किया गया है। इनकी जगह क्रमशः आनंद कुमार सिंह और आयुष श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया है।

आयोग ने एसडीपीओ बाढ़-2 अभिषेक सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का निर्देश भी दिया है। इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (disciplinary action) का आदेश भी जारी हुआ है।

 

क्या है पूरा मामला?

गुरुवार को मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र में जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के लिए प्रचार के दौरान गोलीबारी हुई थी, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई। यह घटना भदौर और घोसवारी थाना क्षेत्र के बीच हुई थी।

पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन एफआईआर दर्ज की हैं और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि गोलीबारी किसने की और इसमें किन लोगों की संलिप्तता है।

अनंत सिंह समेत कई पर मामला दर्ज

मृतक के पोते की शिकायत पर पुलिस ने जदयू उम्मीदवार और मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह समेत चार अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, जन सुराज पार्टी की ओर से भी छह लोगों के खिलाफ एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा पुलिस ने अपनी जांच के आधार पर तीसरा केस दर्ज किया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के चुनावी माहौल में गर्मी बढ़ा दी है, वहीं चुनाव आयोग के इस एक्शन को “जीरो टॉलरेंस नीति” का संकेत माना जा रहा है।

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