Kanker Villagers Protest: “अब नहीं चलेगा आश्वासन!” 68 गांवों के लोगों ने सरकारी दफ्तरों में जड़े ताले
Kanker Villagers Protest: कांकेर जिले में 68 गांवों के ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं और लंबित मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। नाराज ग्रामीणों ने सरकारी दफ्तरों में ताले जड़कर प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है
Kanker Villagers Protest: कांकेर में 68 गांवों के लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। वर्षों से लंबित मांगें, अधूरे वादे और स्कूल शिफ्टिंग के विवाद ने ग्रामीणों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया कि सरकारी दफ्तरों में ताले लग गए। आखिर क्या हैं वो 7 मांगें जिन पर अड़े हैं ग्रामीण? जानिए इस बड़े आंदोलन की पूरी कहानी।
Kanker Villagers Protest: अधूरी मांगों को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। 18 पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन पर उतर आए हैं। नाराज ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप क्षेत्र के कई सरकारी दफ्तरों में ताले जड़ दिए, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
पहले भी मिला था आश्वासन, अब टूटा भरोसा
ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले भी अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। उस दौरान प्रशासन ने उनकी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण लोगों का भरोसा टूट गया और उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
उत्कृष्ट विद्यालय की शिफ्टिंग बना बड़ा मुद्दा
आंदोलन का एक प्रमुख कारण स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय का पखांजूर में स्थानांतरण भी है। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक मुख्यालय के नाम पर विद्यालय को कोयलीबेड़ा क्षेत्र से हटाकर पखांजूर शिफ्ट कर दिया गया, जिससे स्थानीय छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक विद्यालय को वापस नहीं लाया जाता और उनकी सभी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
2 फरवरी के आंदोलन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। 2 फरवरी 2026 को भी कोयलीबेड़ा में 68 गांवों के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था। उस समय प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा देकर आंदोलन खत्म करा दिया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वह आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गया।
प्रशासन समझाने में जुटा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत कर रहे हैं। फिलहाल आंदोलन जारी है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
