जेएनयू में फिर हिंसा : सेंट्रल लाइब्रेरी के फेस रिकग्निशन सिस्टम को तोड़ा, 15-20 लाख का नुकसान
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में शनिवार (22 नवंबर) को एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। डॉ. बी.आर. अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए नए ऑटोमैटिक फेस रिकग्निशन एंट्री सिस्टम को वामपंथी छात्र संगठनों और जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के पदाधिकारियों ने तोड़ दिया। आरोप है कि गोपिका बाबू सहित कुछ छात्रों ने नई व्यवस्था का विरोध जताते हुए गेट और मशीन को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस तोड़फोड़ से करीब 15-20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने वामपंथी संगठनों पर तोड़फोड़ और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। अभाविप का कहना है कि यह महज विरोध नहीं, बल्कि शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने की सुनियोजित साजिश है। जेएनयूएसयू के महासचिव सुनील यादव ने दावा किया कि सिस्टम को छात्र संघ चुनाव के दौरान गुप्त रूप से लगाया गया, जबकि गोपनीयता का उल्लंघन है। उन्होंने लाइब्रेरी में सीमित सीटें, खराब फर्नीचर और पानी की कमी जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्र “लाल सलाम” के नारे लगाते हुए मशीन तोड़ते दिख रहे हैं। अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने इसे जेएनयू की शैक्षणिक संस्कृति पर प्रहार बताया। उन्होंने कहा, “यह गेट या मशीन का नुकसान नहीं, बल्कि सुरक्षित पढ़ाई के माहौल पर हमला है। वामपंथी संगठन राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।”
प्रशासन की कड़ी प्रतिक्रिया, उच्च स्तरीय बैठक आज
विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लिया है। सोमवार (23 नवंबर) को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें पूरी घटना की रिपोर्ट कुलपति और प्रॉक्टर को सौंपी गई। प्रशासन का कहना है कि सिस्टम बाहरी लोगों की प्रवेश रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए लगाया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा रिपोर्ट मांगी गई है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
पिछले महीनों में भी इसी सिस्टम को लेकर विवाद हुआ था। अगस्त 2025 में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद एक समिति गठित की गई थी। जेएनयू रजिस्ट्रार ने कहा कि समिति सभी हितधारकों को शामिल कर सिफारिशें देगी।
बाहरी लोगों की एंट्री और सीट अलॉटमेंट पर बहस तेज
घटना के बाद कैंपस में बाहरी लोगों की मौजूदगी, सीट आवंटन की शिकायतें और प्रशासनिक तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। अभाविप ने कहा कि बहस होनी चाहिए, लेकिन हिंसा जायज नहीं। उन्होंने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई हो और नई व्यवस्था लागू करने से पहले छात्रों से पारदर्शी संवाद हो। जेएनयूएसयू ने सीटिंग क्षमता बढ़ाने, दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं और कार्यवाहक लाइब्रेरियन के इस्तीफे की मांग की है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सिस्टम केवल छात्रों की सुरक्षा के लिए है, न कि निगरानी के लिए। लेकिन छात्र गोपनीयता और लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देकर विरोध कर रहे हैं। यह घटना जेएनयू के लंबे विवादित इतिहास का हिस्सा लग रही है, जहां राजनीतिक संगठन अक्सर आमने-सामने आ जाते हैं।
