Indore Contaminated Water Case Update: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, 3 साल से अटकी नर्मदा पाइपलाइन अब शुरू, लापरवाही पर उठे बड़े सवाल
Indore Contaminated Water Case Update: मध्य प्रदेश के इंदौर में 15 लोगों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है। भागीरथपुरा इलाके में नई नर्मदा जल पाइपलाइन बिछाने का काम अब शुरू कर दिया गया है, जबकि इस परियोजना को वर्ष 2022 में ही मंजूरी मिल चुकी थी। यदि समय पर यह काम पूरा हो जाता, तो दूषित पानी से हुई इन मौतों और सैकड़ों लोगों की बीमारी को रोका जा सकता था।
भागीरथपुरा में 27 साल पुरानी और जर्जर पाइपलाइन को हटाकर नई नर्मदा पाइपलाइन बिछाने के लिए 2.4 करोड़ रुपये की लागत से दो चरणों में योजना बनाई गई थी, लेकिन सरकारी लापरवाही के चलते यह प्रोजेक्ट तीन साल तक फाइलों में ही घूमता रहा।
तीन साल पहले मिली थी मंजूरी, काम अब जाकर शुरू
नगर निगम द्वारा जुलाई 2022 में पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। टेंडर जारी हुए, प्रस्ताव पास हुए, लेकिन इसके बावजूद पहला चरण आज तक पूरा नहीं हो सका। वहीं दूसरा चरण तब शुरू किया गया, जब दूषित पानी पीने से लोगों की जान जाने लगी।
यदि प्रशासन ने समय पर कार्रवाई की होती, तो भागीरथपुरा में 15 लोगों की मौत नहीं होती और हजारों लोग बीमार नहीं पड़ते।
बच सकती थीं 15 जिंदगियां
आज भागीरथपुरा की गलियों में जेसीबी मशीनों की आवाज गूंज रही है। यह आवाज विकास की नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही की है, जो 15 लोगों की मौत के बाद सामने आई। जिस नर्मदा पाइपलाइन को तीन साल पहले जमीन के नीचे उतर जाना चाहिए था, वह अब मौतों के बाद बिछाई जा रही है।
2 करोड़ की लागत से बदली जा रही पूरी लाइन
पूरे इलाके में नई पाइपलाइन बिछाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। पुराने पाइप हटाए जा रहे हैं और नर्मदा जल की नई लाइन डाली जा रही है।
पहले चरण की फाइलों की पूरी कहानी
- जुलाई 2022 – पाइपलाइन बिछाने का टेंडर जारी
- 25 नवंबर 2022 – महापौर परिषद से मंजूरी
- 3 फरवरी 2023 – अपर आयुक्त के हस्ताक्षर
- 6 फरवरी 2023 – महापौर पुष्यमित्र भार्गव के हस्ताक्षर
इतनी औपचारिकताओं के बावजूद पहला चरण अब तक अधूरा है।
दूसरे चरण की देरी बनी जानलेवा
दूसरे चरण की तैयारी नवंबर 2024 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ीं।
दूसरे चरण की टाइमलाइन:
- नवंबर 2024 – फाइल तैयार
- अगस्त 2025 – टेंडर जारी
- सितंबर 2025 – टेंडर खुलना था, लेकिन नहीं खुला
इसी दौरान पुरानी पाइपलाइन में लीकेज हुआ और दूषित पानी घर-घर पहुंचने लगा। महज 10 दिनों में 15 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे।
मौतों के बाद खुला टेंडर
30 दिसंबर 2025 को अपर आयुक्त रोहित सिसोदिया के हस्ताक्षर के बाद 31 दिसंबर को टेंडर खोला गया और ठेकेदार को वर्क ऑर्डर जारी किया गया। तब तक चार लोगों की जान जा चुकी थी। आज पूरे इलाके में खुदाई चल रही है, लेकिन सवाल यही है कि यह काम एक महीने पहले क्यों नहीं हुआ।
जिम्मेदार अधिकारियों पर गिरी गाज
मामले में कार्रवाई करते हुए नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया गया, जिन्होंने 8 महीने तक फाइल रोके रखी। अपर आयुक्त रोहित सिसोदिया को सस्पेंड किया गया है। इसके अलावा इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया गया।
खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
हालांकि नई पाइपलाइन का काम शुरू हो गया है, लेकिन हालात अभी भी गंभीर हैं। अस्पतालों में 208 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 27 की हालत नाजुक बनी हुई है। लोग अब भी टैंकरों के भरोसे पानी पीने को मजबूर हैं, क्योंकि जमीन के भीतर से दूषित पानी का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
