एक बार फिर समय रैना के शो में मजाक पड़ा भारी! ‘बिहारी-कश्मीरी’ कमेंट पर नेताओं ने उठाए सवाल
कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में हुई एक मजाकिया बातचीत ने अब नया विवाद खड़ा कर दिया है। शो के एक हालिया एपिसोड में समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा के बीच बिहार और कश्मीर को लेकर मजाकिया टिप्पणियां हुईं। दोनों की यह नोकझोंक सोशल मीडिया पर चर्चा में आई और देखते ही देखते मामला राजनीतिक प्रतिक्रियाओं तक पहुंच गया। इस विवाद पर शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने समय रैना की आलोचना की, जबकि शिवसेना नेता संजय निरुपम ने लोगों से कॉमेडी को उसी संदर्भ में देखने की अपील की। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने भी टिप्पणियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के सीजन 2 के एक एपिसोड में समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच एक-दूसरे की क्षेत्रीय पहचान को लेकर मजाक शुरू हुआ। समय ने शेरोन के बिहार से जुड़े होने पर टिप्पणी की। इसके जवाब में शेरोन ने समय की कश्मीरी पृष्ठभूमि पर पलटवार किया। बातचीत में दोनों ने एक-दूसरे के राज्य और पहचान को लेकर कई टिप्पणियां कीं। इसी दौरान शेरोन की ओर से दिया गया जवाब सोशल मीडिया पर खास तौर पर चर्चा में आया। यूजर्स ने इसे समय रैना की कश्मीरी पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा और इस बातचीत को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
आनंद दुबे बोले- कॉमेडी में समुदायों को क्यों घसीटना?
शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने इस पूरे मामले को लेकर समय रैना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कॉमेडी के नाम पर किसी विशेष राज्य, जाति या धर्म को निशाना बनाना सही नहीं है। दुबे ने समय रैना को पहले से विवादों में रहने वाला कॉमेडियन बताते हुए कहा कि उन्हें बिहार और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील संदर्भों को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मनोरंजन के लिए क्षेत्रीय और सामुदायिक पहचान को विवाद का हिस्सा क्यों बनाया जाए।
संजय निरुपम ने रखा अलग नजरिया
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस मामले पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह एक कॉमेडी शो है और शो में कही गई बातों को हास्य के संदर्भ में भी समझना चाहिए। हालांकि निरुपम ने यह भी कहा कि बिहार को लेकर की गई टिप्पणी उन्हें उचित नहीं लगी। इसी तरह कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके दर्द से जुड़े संदर्भ को भी उन्होंने संवेदनशील विषय बताया। निरुपम के मुताबिक, ऐसे ऐतिहासिक मुद्दों पर मजाक से बचना चाहिए, लेकिन पूरे मामले को एक कॉमेडी प्रसंग के तौर पर देखकर आगे बढ़ना भी जरूरी है।
बिहार के शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने भारत की एकता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने जताई आपत्ति
जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने विवाद में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का मुद्दा उठाया। संगठन ने कहा कि कॉमेडी में अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी जरूरी है। फोरम ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन एक गंभीर ऐतिहासिक त्रासदी है और इसे महज मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सेंसरशिप की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि ऐसे संवेदनशील विषयों को लेकर जिम्मेदार रवैये की अपेक्षा करता है।
समय रैना के कश्मीरी बैकग्राउंड का आया जिक्र
विवाद के बीच समय रैना के कश्मीर से जुड़े पारिवारिक अनुभवों का भी संदर्भ सामने आया। वह पहले सार्वजनिक तौर पर अपने परिवार के विस्थापन और कश्मीर छोड़ने से जुड़े अनुभवों के बारे में बात कर चुके हैं। इसी वजह से शो में कश्मीर से जुड़ी टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया और तेज हुई। कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके विस्थापन और पीड़ा जैसे विषयों पर मजाक करते समय अतिरिक्त संवेदनशीलता जरूरी है।
कॉमेडी की सीमा को लेकर फिर छिड़ी बहस
इस विवाद ने एक बार फिर कॉमेडी और संवेदनशीलता की सीमा को लेकर बहस शुरू कर दी है। एक पक्ष इसे कॉमेडी शो में हुई आपसी नोकझोंक मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक त्रासदियों से जुड़े मजाक पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच हुई इस बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के कारण मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है।
