3 दिन पहले पाकिस्तान ने की थी गुस्ताखी… अब भारत ने रातों-रात लिया उसका बदला?”
नई दिल्ली। कूटनीतिक मोर्चे पर भारत ने पाकिस्तान को एक साथ दो बड़े झटके दिए हैं। एक तरफ जहां भारत ने ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाते हुए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन की बाहरी सुरक्षा हटा ली है, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के ताजा बयान ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा मशीनरी की हवा निकाल दी है।
दिल्ली में चले बुलडोजर: पाकिस्तानी हाई कमीशन की सुरक्षा हटी
भारत सरकार ने सख्त कूटनीतिक रुख अपनाते हुए दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर लगे ट्रैफिक बोलार्ड और सुरक्षा बैरिकेड्स को बुलडोजर की मदद से हटा दिया है।
क्या है वजह?
दरअसल यह कार्रवाई पाकिस्तान की उस ओछी हरकत का सीधा जवाब है, जिसमें उसने ठीक तीन दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे पार्किंग पोल्स को हटा दिया था। भारत के इस कदम से साफ संदेश गया है कि वह किसी भी पाकिस्तानी हरकत को नजरअंदाज नहीं करेगा।
तनावपूर्ण पृष्ठभमि: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सीजफायर
दोनों पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। पिछले साल पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की जान गई थी) के बाद तनाव अपने चरम पर था। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। हालांकि, 10 मई को हुए सीजफायर के बाद सैन्य तनाव थोड़ा थमा था, लेकिन अब कूटनीतिक मोर्चे पर तल्खी फिर बढ़ गई है।
अमेरिका ने भी उड़ाई पाकिस्तान की नींद
कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। भारत में अमेरिका के राजदूत और दक्षिण-मध्य एशिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे ने इस्लामाबाद की चिंताएं कई गुना बढ़ा दी हैं।
सर्जियो गोर ने श्रीनगर में दो-टूक कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बेहद खूबसूरत जगह है और यहां आकर मैं बहुत खुश हूं। अमेरिकी दूत ने इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के “बेहतरीन कदमों” की जमकर तारीफ की।
सबसे बड़ा झटका देते हुए गोर ने संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही जम्मू-कश्मीर के लिए जारी अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है, जिससे घाटी में विदेशी पर्यटन और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर को लेकर जो झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करता रहा है, अमेरिकी राजदूत के इस स्पष्ट बयान ने उस पर पानी फेर दिया है।
