भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था… जापान को पीछे छोड़ा, लेकिन गरीबी और फ्रीबीज की चुनौती बरकरार
नई दिल्ली। नए साल (1 जनवरी 2026) की पूर्व संध्या पर भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹350 लाख करोड़) की जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। मोदी सरकार ने इसे ‘परिभाषित क्षण’ करार देते हुए कहा है कि यह उपलब्धि मजबूत घरेलू मांग, निर्यात वृद्धि और सुधारों का नतीजा है। भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जहां वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में रियल जीडीपी 8.2% बढ़ी।
आरबीआई और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान
आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। आईएमएफ, विश्व बैंक, एसएंडपी, एडीबी और फिच जैसी एजेंसियां 2025-26 में 6.2% से 7.4% तक ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं। सरकार का दावा है कि 2030 तक जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹655 लाख करोड़) पहुंच जाएगी, जिससे भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
दूसरा पहलू: गरीबी और फिस्कल चुनौतियां
हालांकि यह उपलब्धि गर्व की है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी गंभीर है। भारत की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा अभी भी गरीबी रेखा के नीचे है। विश्व बैंक और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, 2022-23 तक एक्सट्रीम पॉवर्टी (2.15 डॉलर/दिन से कम) 2.3% तक गिर चुकी है, लेकिन 2025 में भी करोड़ों लोग गरीबी से जूझ रहे हैं। कुछ अनुमानों में 8 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे बताए जाते हैं, हालांकि हालिया विश्व बैंक डेटा में यह संख्या काफी कम (लगभग 3 करोड़ के आसपास) दिखाई गई है।
फ्रीबीज राजनीति का बोझ
राज्यों में फ्री स्कीम्स (मुफ्त बिजली, राशन, लाड़ली बहना जैसी योजनाएं) और वेतन-पेंशन पर 80% तक खर्च हो रहा है। पंजाब में विकास के लिए सिर्फ 7% राशि बचती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, बिहार जैसे राज्यों का कर्ज जीडीपी का एक तिहाई या ज्यादा है। बंगाल में ब्याज का बोझ शिक्षा-स्वास्थ्य बजट से अधिक है। महाराष्ट्र में 903 विकास प्रोजेक्ट रद्द हुए।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2025 में फ्रीबीज पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा कि मुफ्त राशन और पैसे से लोग काम करने से कतराते हैं, इससे ‘परजीवी’ (parasitic) संस्कृति बढ़ रही है। जस्टिस बी.आर. गवई ने पूछा कि क्या फ्रीबीज से गरीबों को मुख्यधारा में जोड़ने की बजाय समाज का बोझ बढ़ाया जा रहा है? कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से संतुलित नीति की अपील की।
भारत की आर्थिक उड़ान प्रभावशाली है, लेकिन असमान विकास, गरीबी और राज्यों की फिस्कल सेहत सुधार की मांग करती है। 2030 तक तीसरी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य तभी हासिल होगा जब विकास समावेशी हो और फ्रीबीज की बजाय रोजगार-उन्मुख नीतियां अपनाई जाएं।
